चित्रकूट के इस मंदिर में भरत ने की थी राम से मुलाकात, जानें मान्यता
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Chitrakoot News: मंदिर के महंत दिव्य जीवनदास ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि भरत जी ने मंदाकिनी नदी में स्नान किया और फिर भरत मंदिर में विश्राम किया.
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चित्रकूट: उत्तर प्रदेश का चित्रकूट धाम धार्मिक लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है. यह वही पवित्र स्थान है जहां भगवान राम ने अपने वनवास का अधिकांश समय व्यतीत किया. यही वह धरा है जहां भरत जी और भगवान राम का ऐतिहासिक संवाद हुआ था. इसे भारतीय धर्मग्रंथों में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है.
चित्रकूट के रामघाट में स्थित भरत मंदिर भक्तों की श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है. मान्यता के अनुसार जब राम वनवास के लिए अयोध्या छोड़कर चित्रकूट पहुंचे तब भरत जी अपनी तीनों माताओं केकई, कौशल्या और सुमित्रा के साथ अपने गुरुजनों और समस्त अयोध्यावासियों के संग राम को मनाने आए थे.
पुजारी ने दी जानकारी
मंदिर के महंत दिव्य जीवनदास ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि भरत जी ने मंदाकिनी नदी में स्नान किया और फिर भरत मंदिर में विश्राम किया. इसके बाद भरत और राम के बीच चार से पांच दिन तक लंबा संवाद चला. भरत जी बार-बार भगवान राम से अयोध्या वापस चलने का आग्रह करते रहे, लेकिन राम ने पिता दशरथ के वचन की रक्षा के लिए अपना वनवास जारी रखने का संकल्प दोहराया.
राम ने भरत को खड़ाऊं सौंपकर दिया राज्य संचालन का आदेश
उनका कहना है कि भरत जी ने अपने अग्रज राम से कुछ चिन्ह देने की प्रार्थना की, जिससे वे अयोध्या लौटकर राम की अनुपस्थिति में भी उनके आदर्शों का पालन कर सकें. तब भगवान राम ने अपनी खड़ाऊं (पादुका) भरत जी को सौंपी और आदेश दिया कि वे अयोध्या वापस जाकर राज्य की जिम्मेदारी संभालें. भरत जी ने अपने भ्राता के इस आदेश को स्वीकार किया और प्रभु श्री राम की खड़ाऊं को अयोध्या के सिंहासन पर विराजमान कर स्वयं नंदीग्राम में रहकर राज्य का संचालन किया. मान्यता है कि इस मंदिर में श्रद्धा और विश्वास के साथ आने वालों के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.