चुनाव बीएमसी का और गूँज संभलकी .. ओवैसी ने कैसे बढ़ा दी अखिलेश की टेंशन

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चुनाव बीएमसी का और गूँज संभलकी .. ओवैसी ने कैसे बढ़ा दी अखिलेश की टेंशन


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UP Politics: महाराष्ट्र के बीएमसी चुनाव में AIMIM चीफ ने आक्रामक प्रचार करते हुए संभल की जामा मस्जिद और वक्फ कानून का मुद्दा उठाया. असदुद्दीन ओवैसी ने संभल की जामा मस्जिद को खतरे में बताते हुए मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने की कोशिश की. हालांकि उनका प्रचार महारष्ट्र में था, लेकिन इसकी गूँज यूपी तक पहुंची है. जानकारों का मानना है कि ओवैसी जानते हैं कि यूपी में मुस्लिम वोटों की लामबंदी अपने पक्ष में करनी है तो उकसावे वाली सियासत करना ही पड़ेगा. अगर महारष्ट्र में वे इसमें सफल होते हैं तो इसका असर यूपी में भी देखने को मिलेगा. इतना ही नहीं यह स्थिति अखिलेश यादव को भी असहज करने वाली होगी.

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असदुद्दीन ओवैसी ने बीएमसी चुनाव में संभल मस्जिद का मुद्दा उठाया

लखनऊ. वैसे तो चुनाव महाराष्ट्र में बीएमसी का है, लेकिन चुनाव प्रचार के आखिरी दिन संभल की जामा मस्जिद की गूंज जोर शोर से सुनाई दी. बीएमसी चुनाव के लिए 5 जनवरी 2026 को मतदान होना है. इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रचार के दौरान उत्तर प्रदेश के संभल में शाही जामा मस्जिद विवाद के मुद्दे को जोर-शोर से उठाकर उत्तर प्रदेश की सियासी फिजा को गरमा दिया. हैदराबाद के ओवैसी भाईजान बीएमसी चुनाव के बहाने 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोट बैंक की लामबंदी में जुटे नजर आए. ओवैसी की यह रणनीति पश्चिम यूपी के मुस्लिम बहुल सीटों पर समाजवादी पार्टी की टेंशन बढ़ाने वाली मानी जा रही है.

ओवैसी ने अपने भाषणों में आरोप लगाया कि संभल में 500 साल पुरानी मस्जिद परेशानी में हैं.  उनका इशारा शाही जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद की ओर था. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार ने वक्फ बोर्ड का काला कानून बनाया और उसके जरिए सरकार मस्जिदों, मजारों और दरगाहों पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है. यह बात मान लो कि संभल की शाही जामा मस्जिद परेशानी में हैं कानून बनने के बाद. उन्होंने कहा, “क्या तुमने नहीं देखा दिल्ली में 100 साल पुरानी मस्जिद है, रातों रात सर्वे होता है, और सुबह बुलडोजर एक्शन हो जाता है.” अब ओवैसी भाईजान ने संभल मस्जिद का चैप्टर क्यों उठाया? क्योंकि मामला कोर्ट में है और इस सच्चाई को छिपाकर ओवैसी क्यों कह रहे हैं कि मस्जिद खतरे में हैं.

मुस्लिम तुष्टिकरण से लामबंदी

जानकारों का मानना है कि ओवैसी का यह बयान मुस्लिम तुष्टिकरण से जुड़ा है. उकसावे के बिना मुस्लिम वोट बैंक AIMIM के पक्ष में कैसे लामबंद होगा. यह स्थिति समाजवादी पार्टी के लिए असहज करने वाली है क्योंकि इस वोट बैंक पर वह हमेशा से हक जमाती रही है. अब ओवैसी इस वोट बैंक को शाही जामा मस्जिद वाले दांव से भुनाना चाहते हैं. इससे पहले भी ओवैसी अखिलेश यादव पर कई बार हमला किया है.

अखिलेश यादव के लिए चुनौती क्यों?

दरअसल, संभल और आसपास के इलाकों में मुस्लिम वोटरों की अच्छी-खासी संख्या है, जो लंबे समय से समाजवादी पार्टी (सपा) का मजबूत वोट बैंक रही है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी संभल मामले पर बीजेपी सरकार पर साजिश का आरोप लगाया था, लेकिन ओवैसी का इस मुद्दे को महाराष्ट्र के चुनाव प्रचार में जोड़ना सपा के लिए टेंशन का सबब बन गया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी AIMIM के जरिए यूपी में मुस्लिम वोटों पर सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं. अगर AIMIM मुस्लिम वोटरों को अपनी ओर खींच लेती है, तो सपा की मुस्लिम-यादव समीकरण वाली रणनीति कमजोर पड़ सकती है. ओवैसी पहले भी यूपी में सक्रिय रहे हैं और संभल जैसे इलाकों में उनकी पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया है.

महाराष्ट्र के साथ यूपी में भी ताकत बढ़ाने की कोशिश 

बीएमसी चुनाव में मुस्लिम वोटर (लगभग 20% आबादी) कई वार्डों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. ओवैसी की यह रणनीति न सिर्फ महाराष्ट्र में AIMIM की ताकत बढ़ाने की है, बल्कि यूपी में भी सपा को चुनौती देने की है. अभी देखना बाकी है कि ओवैसी की यह ललकार कितना असर दिखाती है, लेकिन यह साफ है कि संभल का मुद्दा अब सिर्फ यूपी तक सीमित नहीं रहा—यह महाराष्ट्र के चुनावी मैदान में भी गूंज रहा है.

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