छोटे ठेले से रेस्टोरेंट तक का सफर, जॉर्ज के हाथ की बिरयानी का गोरखपुर में जलवा

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छोटे ठेले से रेस्टोरेंट तक का सफर, जॉर्ज के हाथ की बिरयानी का गोरखपुर में जलवा


गोरखपुर: कहते हैं कि अगर मेहनत और हुनर साथ हो, तो इंसान छोटी शुरुआत से भी बड़ी मंजिल तक पहुंच सकता है. गोरखपुर के जॉर्ज फर्नांडीज पॉल की कहानी इसी बात की मिसाल है. ठेले से शुरू हुआ उनका सफर आज शहर के एक लोकप्रिय रेस्टोरेंट तक पहुंच चुका है, जहां रोज सैकड़ों लोग उनके हाथों के स्वाद का लुत्फ उठाने आते हैं.

जॉर्ज का बचपन साधारण परिवार में बीता, उनके पिता कैटरिंग का काम करते थे और बड़े आयोजनों में खाना बनाने का काम संभालते थे. इसी माहौल में जॉर्ज ने भी काम सीखना शुरू किया. शुरुआती दौर में वह शादियों और बड़े फंक्शन में वेटर का काम करते थे. पिता हलवाई भी थे, इसलिए जॉर्ज को बचपन से ही खाना बनाने की अच्छी समझ मिल गई थी.

कुछ समय गाड़ी चलाने का किया काम

कुछ समय बाद जॉर्ज ने खुद का काम शुरू करने का फैसला किया और एक छोटे से ‘ठेले पर नॉनवेज आइटम्स बेचने लगे. लोगों को उनके हाथ का स्वाद काफी पसंद आया. हालांकि शुरुआती दौर में दुकान ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकी और हालात ऐसे बने कि जॉर्ज को कुछ समय के लिए गाड़ी चलाने का काम करना पड़ा.

परिवार के साथ फिर शुरू किया नया काम

जॉर्ज ने हार नहीं मानी और कुछ समय बाद उन्होंने फिर से एक दुकान शुरू की, जिसमें पूरा परिवार उनके साथ खड़ा हो गया. पत्नी और बच्चे भी दुकान संभालने लगे. इसी दौरान उन्होंने अपने आउटलेट का नाम जॉर्ज बिरयानी रखा. शुरुआत भले ही छोटी थी, लेकिन उनके हाथ के खाने का स्वाद लोगों को इतना पसंद आया कि धीरे-धीरे कस्टमर की संख्या बढ़ने लगी. खास बात यह थी कि जॉर्ज खुद किचन में खड़े होकर हर डिश तैयार करते थे.

जॉर्ज के हाथ का खास स्वाद

जॉर्ज अपने हाथों से ‘मटन बिरयानी, चिकन बिरयानी, मटन दो प्याजा और चिकन दो प्याजा’ जैसे कई नॉनवेज व्यंजन बनाते हैं. उनके खाने का स्वाद इतना खास है कि उन्हें अलग से हलवाई रखने की जरूरत नहीं पड़ती है. किचन में जॉर्ज खाना बनाते हैं, जबकि बाहर काउंटर और सर्विस का काम उनका बेटा और पत्नी संभालते हैं.

आज अपना रेस्टोरेंट, आगे बड़ा सपना

धीरे-धीरे काम बढ़ता गया और आज जॉर्ज ने शहर के एल्युमिनियम फैक्ट्री इलाके में अपना रेस्टोरेंट खोल लिया है. यहां हर दिन बड़ी संख्या में लोग बिरयानी और नॉनवेज व्यंजनों का स्वाद लेने पहुंचते हैं. सबसे खास बात यह है कि आधुनिक गैस-चूल्हों के बावजूद जॉर्ज आज भी कई डिश लकड़ी की आंच पर बनाते हैं, जिससे खाने का स्वाद और भी लाजवाब हो जाता है.

जॉर्ज का सपना यहीं खत्म नहीं होता, वह आने वाले समय में शहर में अपने और भी रेस्टोरेंट खोलकर जॉर्ज बिरयानी की एक बड़ी चेन बनाना चाहते हैं. ठेले से शुरू हुआ यह सफर आज गोरखपुर में मेहनत और स्वाद की एक मिसाल बन चुका है.



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