जिन्हें अपनों ने ठुकराया, उनके लिए सहारा बना UP का यह शख्स, लिया है खास प्रण

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जिन्हें अपनों ने ठुकराया, उनके लिए सहारा बना UP का यह शख्स, लिया है खास प्रण


महराजगंज: हमारे आसपास बहुत से ऐसे लोग देखने को मिल जाएंगे, जो सड़कों पर अपना जीवन काट रहे हैं. इनमें से ज्यादातर लोग ऐसे हैं, जो पूरी तरह से गरीब और असहाय हैं. ऐसे असहाय लोगों में उन लोगों की संख्या ज्यादा है, जिनको उनके घरवालों ने उम्र के एक ऐसे पड़ाव पर लाकर छोड़ दिया है, जहां वह अपनी आगे की जिंदगी बनाने की नहीं, बल्कि किसी तरह अपनी जिंदगी को काटने की कोशिश करते हैं.

समाज सेवा का एक बड़ा जिम्मा
ऐसे लोगों को कुछ ज्यादा नहीं, बल्कि सिर्फ एक छोटा सा सहारा ही इनके चेहरे पर मुस्कान लेकर आ सकती है. ऐसे लोगों की मदद करने और उनके चेहरे पर दोबारा वही मुस्कान लाने की कोशिश महराजगंज जिले के प्रदीप कटियार कर रहे हैं, जिन्होंने समाज सेवा का एक बड़ा जिम्मा उठाया है.

ऐसे वृद्धजन जो अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में समस्याओं का सामना करते हैं और परिवार में विवाद के कारण या आर्थिक स्थिति सही न होने की वजह से अपने घर से दूर हो जाते हैं, उनके लिए प्रदीप कटियार एक सहारा हैं, जो उनके इस उम्र के पड़ाव पर उनकी सेवा करते हैं.

लखनऊ विश्वविद्यालय से सोशल वर्क की पढ़ाई
प्रदीप कटियार की बात करें, तो वह महराजगंज जिले के फरेंदा क्षेत्र में आधारशिला वृद्धाआश्रम में प्रबंधक के रूप में कार्य कर रहे हैं. उनके इस वृद्धाआश्रम में सौ से भी ज्यादा ऐसे लोग रहते हैं, जो किसी कारणवश अपने परिवार से दूर हो चुके हैं और किसी तरह अपनी जिंदगी को गुजारने की कोशिश कर रहे हैं.

इन लोगों को मिलती है प्राथमिकता
प्रदीप कटियार ने बताया कि उनके वृद्धाआश्रम में ऐसे लोगों को प्राथमिकता दी जाती है, जिनकी स्थिति बहुत ही ज्यादा कमजोर है और वह हर तरह से असहाय हैं. ऐसे असहाय लोगों की जो अपने घर और परिवार से किसी कारणवश दूर हो चुके हैं, उनके लिए प्रदीप कटियार एक सहारा बनकर उभरे हैं.

प्रदीप कटियार की शुरुआती समय से ही सामाजिक कार्यों में रुचि रही है और इसको बढ़ाते हुए उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से सोशल वर्क की पढ़ाई भी पूरी की. अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वह अलग-अलग सामाजिक कार्यों में और भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने लगे.

इस समय से कर रहे हैं वृद्धाआश्रम का संचालन
प्रदीप कटियार ने अपनी पढ़ाई कंप्लीट करने के बाद उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की अलग-अलग हिस्सों में सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे. उन्होंने उत्तराखंड के दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल वैन के माध्यम से जुड़कर समाज सेवा की. इसके अलावा उन्होंने उत्तर प्रदेश के पंचायती राज व्यवस्था से भी जुड़े और समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच सोशल सर्विस का काम किया और उसके साथ ही अपने एक्सपीरियंस को बढ़ाते हुए समाज सेवा के क्षेत्र में अपने आप को और भी ज्यादा मजबूत बनाया.

आत्म संतुष्टि ही जीवन का उद्देश्य
उन्होंने बताया कि अप्रैल 2017 से वह वृद्धआश्रम का संचालन कर रहे हैं और लगातार ऐसे बुजुर्ग और असहाय लोगों की सेवा कर रहे हैं, जिनसे उन्हें आत्म संतुष्टि मिलती है और अब उनके जीवन का यह उद्देश्य बन चुका है. ऐसे लोग जो समाज सेवा का प्रयास करते हैं, वह समाज के लिए एक प्रेरणा के स्रोत हैं, जिससे बेसहारा लोगों को सहारा मिलता है और उन्हें समाज में जीने का हक भी मिलता है.



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