जिसे लोग मानते हैं अशुभ… घर में लगा दिए उसके 3000 पौधे! जानें कैक्टस के दीवाने हर्षल की कहानी
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Pilibhit News : जिस कैक्टस के पौधे को लोग अशुभ मानते हैं, वही हर्षल के लिए शौक और जुनून बन गया. घर में हर्षल ने 3000 से अधिक कैक्टस के पौधे लगा दिए हैं. उनके इस पॉली हाउस में 500 से भी अधिक प्रजातियों के कैक्टस मौजूद हैं. हर्षल सिंह बीते 10 सालों से दिन रात की मेहनत कर दुर्लभ प्रजातियों के कैक्टस को उगा रहे हैं.
पीलीभीत. आमतौर पर लोग नागफनी के पौधे को अशुभ मानते हैं. अगर कोई इन्हें घर पर रखता भी है तो मुख्य द्वार के बाहर, मगर पीलीभीत के रहने वाले हर्षलस ने अपनी छत पर एक दो नहीं, कैक्टस की तमाम प्रजातियों के 3 हजार से भी अधिक पौधे लगाए हुए हैं. इनमें से एक प्रजाति तो ऐसी भी है जो साल भर में महज़ आधा सेंटीमीटर ही बढ़ती है.
ऐरियो कार्पस की खासियत
लेकिन बीते 10 सालों से हर्षल इसमें पूरी तरह से डेडिकेटेड हो गए हैं. उनके इस पॉली हाउस में 500 से भी अधिक प्रजातियों के कैक्टस मौजूद हैं, लेकिन इनमें सबसे खास ऐरियो कार्पस है. इस नागफनी की प्रजाति पर अधिक जानकारी देते हुए हर्षल सिंह ने बताया कि यह प्रजाति मुख्य तौर पर दक्षिण व उत्तरी अमेरिका में पाई जाती है. यह अपने आप में इसलिए खास है, क्योंकि इसके बढ़ने की गति काफी कम है. कई बार तो यह एक साल में महज आधा सेंटीमीटर की ग्रोथ करता है. इसलिए यह अपने आप में काफी दुर्लभ माना जाता है, इसी कारण इसकी कीमत भी काफी अधिक होती है.
प्रकृति की हर चीज है सकारात्मक
लोकल 18 से बातचीत के दौरान हर्षल सिंह ने कहा कि आम तौर पर लोगों के मन में कैक्टस को लेकर तरह तरह की अवधारणा बनी हुई हैं. कई लोगों का मानना होता है कि कंटीले पौधे नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं. मगर ऐसा कुछ भी नहीं है, लोगों को ख़ुद ही सोचना चाहिए की प्रकृति की बनायी हुई कोई भी चीज़ नकारात्मक कैसे हो सकती है. सभी को चाहिए कि इन अवधारणाओं को तोड़ें और अपने घरों में कैक्टस लगाएं.
मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें
मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु… और पढ़ें