जौनपुर के ‘ईरानी मोहल्ले’ में मातम: ख़ामेनेई की मौत पर छलका दर्द

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जौनपुर के ‘ईरानी मोहल्ले’ में मातम: ख़ामेनेई की मौत पर छलका दर्द


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ख़ामेनेई की मौत की खबर ने इस छोटे से मोहल्ले में गहरा असर छोड़ा है। शोक सभाएं हो रही हैं, दुआएं मांगी जा रही हैं और लोगों के दिलों में अपने रहबर के लिए सम्मान और यादें ताजा हैं।

जौनपुर: नगर के अचला देवी घाट के पास बसे ‘ईरानी मोहल्ले’ में  गहरा सन्नाटा छा गया, जब अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या की खबर यहां पहुंची. तीन पीढ़ी पहले ईरान से आकर जौनपुर में बस गए परिवारों ने अपने रहबर के जाने पर शोक और आक्रोश दोनों जताए. ईरानी लोगों ने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि उनके लिए एक विचार और नेतृत्व पर हमला है. महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि “एक ख़ामेनेई को मारा गया है, लेकिन कई ख़ामेनेई खड़े हो जाएंगे.” उनका आरोप है कि अमेरिका और इजरायल ने धोखे से यह कार्रवाई की.

महिलाओं का दर्द और गुस्सा

मोहल्ले की बुजुर्ग महिला मखमल ख़ातून ने कहा कि ख़ामेनेई ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले नेता थे. “उनके जाने से हम खुद को यतीम महसूस कर रहे हैं,” उन्होंने भावुक होकर कहा.

ईरानी मोहल्ले की सरपरस्त फ़ातिमा बेगम ने फ़ारसी भाषा में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जैसे कर्बला में इमाम हुसैन ने अत्याचार के खिलाफ लड़ते हुए शहादत दी थी, वैसे ही ख़ामेनेई भी अन्याय के विरुद्ध डटे रहे. कुछ महिलाओं ने उनकी तुलना महात्मा गांधी से करते हुए कहा कि गांधी जी की तरह वे भी दबाव में नहीं झुके और अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे.

फ़िज़ा का दर्द 

मोहल्ले की युवती फ़िज़ा ने कहा, “हमने अपने बुजुर्गों से ईरान की कहानियां सुनी हैं. ख़ामेनेई हमारे लिए सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि हमारी पहचान का हिस्सा थे. अगर एक आवाज़ खामोश हुई है, तो नई आवाज़ें भी उठेंगी. हम अन्याय के खिलाफ हमेशा खड़े रहेंगे.”

पीढ़ियों से जुड़ा रिश्ता

अचला देवी घाट के पास बसे इस मोहल्ले में करीब तीन पीढ़ियों पहले ईरान से आए परिवारों ने मेहनत-मजदूरी से अपनी पहचान बनाई और भारतीय नागरिकता लेकर यहीं रच-बस गए. लेकिन अपने मूल देश और वहां के नेतृत्व से उनका भावनात्मक जुड़ाव आज भी कायम है. ख़ामेनेई की मौत की खबर ने इस छोटे से मोहल्ले में गहरा असर छोड़ा है. शोक सभाएं हो रही हैं, दुआएं मांगी जा रही हैं और लोगों के दिलों में अपने रहबर के लिए सम्मान और यादें ताजा हैं.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें



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