जौनपुर: ‘भोजन छोड़ दो, आगे का रास्ता…’, मां दुर्गा का आदेश इस शख्स के लिए बना प्रण, आज बिना अन्न बीता रहे जीवन

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जौनपुर: ‘भोजन छोड़ दो, आगे का रास्ता…’, मां दुर्गा का आदेश इस शख्स के लिए बना प्रण, आज बिना अन्न बीता रहे जीवन


जौनपुर: जिले के धार्मिक वातावरण में राम प्रीत मिश्र फलाहारी महाराज सालों से चर्चा का केंद्र बने हुए हैं, जो पिछले 30 वर्षों से अन्न का सेवन बिल्कुल नहीं करते हैं. उनका पूरा जीवन सिर्फ फल, दूध और प्राकृतिक पेय पर आधारित है. आश्चर्य की बात यह है कि इतने लंबे समय तक अन्न त्यागने के बाद भी वे आज पूरी तरह स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान हैं. उनके भक्त और जानने वाले उन्हें एक दृढ़ संकल्प वाले तपस्वी के रूप में सम्मान देते हैं.

फलाहारी महाराज बताते हैं कि लगभग तीन दशक पहले एक दिन वे मंदिर में ध्यानमग्न अवस्था में बैठे हुए थे, तभी उन्हें भीतर से एक दिव्य आवाज सुनाई दी, ‘भोजन छोड़ दो, आगे का मार्ग स्वयं खुल जाएगा’. महाराज का दावा है कि वह आवाज मां दुर्गा की थी, जिसने उन्हें अन्न त्यागने का आदेश दिया. उस क्षण को याद करते हुए वे कहते हैं कि उन्होंने उसी पल संकल्प ले लिया कि अब वे जीवनभर भोजन नहीं करेंगे, और तब से आज तक उन्होंने अन्न को हाथ तक नहीं लगाया.

मां दुर्गा की शक्ति से मिल रही प्रेरणा

महाराज के अनुसार, अन्न छोड़ने के बाद भी न तो उन्हें किसी प्रकार की शारीरिक कमजोरी महसूस हुई, न कोई बीमारी हुई. उल्टे उनका मन और अधिक शांत, स्थिर और आध्यात्मिक होता चला गया. वे कहते हैं कि मां दुर्गा की कृपा और नियमित साधना ने उन्हें ऐसी शक्ति दी है कि वे फलाहार पर ही सहज रूप से जीवन व्यतीत कर रहे हैं.

महाराज रोजाना भोर में उठकर योग, प्राणायाम और ध्यान करते हैं, जिसके बाद दिन में एक या दो बार सिर्फ फल, दूध या नींबू-पानी जैसे प्राकृतिक पदार्थों का सेवन करते हैं. उनका कहना है कि प्रकृति स्वयं मनुष्य को इतना कुछ देती है कि यदि मन शुद्ध और संतुलित हो तो फलाहार ही जीवन के लिए पर्याप्त है. उनका दावा है कि शरीर को संतुलित रखने के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रकृति के इन सरल और सात्विक आहारों में पूरी मात्रा में मौजूद रहती है.

जीवनशैली और तपस्या लोगों को करती आकर्षित

अजय पांडेय बताते हैं कि फलाहारी महाराज को वर्षों से देखते आ रहे हैं और वे हमेशा प्रसन्नचित्त, स्वस्थ और ऊर्जावान दिखाई देते हैं. कई लोग उनकी जीवनशैली और तपस्या को प्रेरणादायी मानते हैं और उनके आश्रम में आकर आशीर्वाद लेते हैं. भक्तों का विश्वास है कि उनकी साधना और त्याग से क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण और अधिक सशक्त हुआ है.

हालांकि विज्ञान के अनुसार, बिना भोजन के लंबे समय तक जीवित रहना कठिन है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं और आध्यात्मिक साधना के क्षेत्र में ऐसे तपस्वियों के उदाहरण अक्सर चर्चा में रहते हैं. फलाहारी महाराज भी उन्हीं विलक्षण व्यक्तित्वों में एक माने जाते हैं, जिनकी जीवनशैली लोगों में कौतूहल और श्रद्धा दोनों पैदा करती है. राम प्रीत मिश्र फलाहारी महाराज कहते हैं, ‘जब ईश्वर की कृपा हो और मन साधना में स्थिर हो तो जीवन सरल भी हो जाता है और शक्तिशाली भी.’ तीन दशक से भोजन त्याग कर भी आज वे पूर्णत: स्वस्थ हैं, यह उनके अद्भुत आध्यात्मिक विश्वास और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है.



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