झांसी का कुंड जहां दुख हो जाता है कम, बस सच्चे मन से दाना दें और देखें कैसे मछलियां हरती हैं आपका कष्ट!
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झांसी की एक पुरानी धर्मशाला के पास एक गहरा कुंड है, जिसमें हमेशा पानी भरा रहता है और बहुत सी मछलियाँ रहती हैं. इन्हें लोग संकट मोचन कहते हैं, क्योंकि पुराने समय से यहाँ आने वाले लोग मानते हैं कि ये मछलियाँ उनके दुख हरती हैं. हर सुबह बच्चे, बूढ़े और महिलाएं दाना लेकर कुंड के किनारे खड़े होकर मछलियों को खिलाते हैं. मछलियां पानी से ऊपर आती हैं और दाना खाती हैं, तो लोगों के चेहरे पर खुशी और मन में शांति छा जाती है. यही भरोसा और प्रेम इस कुंड और उसकी मछलियों की पहचान बन गया है.
झांसी. शहर में एक पुरानी पानी वाली धर्मशाला है, जिसके पास एक गहरा कुंड है. इस कुंड का पानी साल भर भरा रहता है और इसमें बहुत सी मछलियां रहती हैं. लोग इन मछलियों को संकट मोचन कहते हैं, संकट मोचन का अर्थ होता है दुख दूर करने वाला. पुराने लोग बताते हैं कि बहुत समय पहले यहां एक साधु रहते थे. वह रोज इस कुंड के पास बैठकर पूजा करते थे, एक दिन उन्होंने कहा कि इस कुंड की मछलियां लोगों के दुख हरेंगी. बस लोग सच्चे मन से दाना खिलाएं, तब से यह बात लोगों के मन में बस गई।. धीरे-धीरे यह जगह आस्था का स्थान बन गई, सुबह से शाम तक लोग यहां आते हैं. बच्चे, बूढ़े और महिलाएं सब अपने साथ आटा, चना या दाना लेकर आते हैं. वे कुंड के किनारे खड़े होकर मछलियों को दाना खिलाते हैं, जब मछलियां पानी से ऊपर आती हैं और दाना खाती हैं, तो लोगों के चेहरे पर खुशी आ जाती है. लोगों को लगता है कि उनका दुख अब हल्का हो गया है.
कई लोग कहते हैं कि जब उनका काम रुक गया था, तब वे यहां आए. उन्होंने मछलियों को दाना खिलाया और मन से प्रार्थना की, कुछ दिन बाद उनका काम बन गया. किसी का नौकरी का काम बन गया, किसी की शादी तय हुई, किसी का घर का झगड़ा खत्म हुआ. तब से लोगों का भरोसा और भी बढ़ गया. असल में, जब कोई व्यक्ति दुख में होता है तो उसका मन डरा हुआ रहता है. यहांं आकर उसे शांति मिलती है, पानी को देखकर मन ठंडा होता है. मछलियों को दाना देने से उसे लगता है कि वह कोई अच्छा काम कर रहा है. जब मन साफ होता है, तो सोच भी साफ होती है, इससे बिगड़े हुए काम पर आसानी से समाधान निकल आता है.
इस कुंड की मछलियों को कोई पकड़ता नहीं है, लोग उन्हें अपने परिवार की तरह मानते हैं. बच्चे उन्हें नाम से बुलाते हैं और हाथ जोड़कर प्रणाम करते हैं. यहां का माहौल बहुत सरल है, कोई शोर नहीं होता, बस पानी की हल्की सी आवाज़ और लोगों की धीमी प्रार्थना मछलियों के कानों तक अक्सर पहुंचती रहती है. इसी भरोसे और प्रेम के कारण इन मछलियों को संकट मोचन कहा जाता है, लोग मानते हैं कि सच्चे मन से किया गया छोटा सा काम भी बड़ा फल देता है और यही बात इस कुंड की पहचान बन गई है.
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