झांसी मेडिकल कॉलेज में इलाज के आभाव में नवजात बच्ची ने तोड़ा दम, परिजनों ने लगाया लापरवाही और संवेदनहीनता का आरोप

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झांसी मेडिकल कॉलेज में इलाज के आभाव में नवजात बच्ची ने तोड़ा दम, परिजनों ने लगाया लापरवाही और संवेदनहीनता का आरोप


Agency:News18 Uttar Pradesh

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झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एक नवजात बच्ची की इलाज के बिना एम्बुलेंस में ही मौत हो गई. इस बच्ची को मेडिकल कॉलेज से सिविल हॉस्पिटल रेफर किया गया था और सिविल हॉस्पिटल के डाक्टरों ने वापस मेडिकल क…और पढ़ें

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मृत बच्ची के साथ पिता 

झांसी का मेडिकल कॉलेज अपनी गलतियों से सीखता नजर नहीं आ रहा है. इतने बड़े अग्निकांड के बाद भी मरीजों के प्रति संवेदनशीलता दिखाई नहीं दे रही है. झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एक नवजात बच्ची की इलाज के बिना एम्बुलेंस में ही मौत हो गई. इस बच्ची को मेडिकल कॉलेज से सिविल हॉस्पिटल रेफर किया गया था और सिविल हॉस्पिटल के डाक्टरों ने वापस मेडिकल कॉलेज भेज दिया. बच्ची के परिजनों का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज में कोई डॉक्टर उसे देखने तक नहीं आया.

5 घंटे तक भटकता रहा पिता

बताया जा रहा है कि ललितपुर के रहने वाले परिवार की बच्ची का जन्म शुक्रवार सुबह मेडिकल कॉलेज में हुआ था. उसे सांस लेने में दिक्कत थी. चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन जिला अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया. परिवार के आरोप के अनुसार अब वापस बच्ची को लेकर पहुंचा तो बच्ची को कोई डाक्टर देखने तक नहीं आया और एम्बुलेंस में इन्तजार करते-करते बच्ची की मौत हो गयी. हद तो तब हो गई बच्ची के पिता 5 घंटे तक एम्बुलेंस में यहां से वहां भटकते रहे. इस वजह से बच्ची की मौत हो गई.

ऑक्सिजन की कमी 

बच्ची के पिता सोनू के अनुसार गर्भवती पत्नी को ललितपुर से झांसी से रेफर किया गया था. झांसी मेडिकल कॉलेज में बच्ची का जन्म हुआ. इसके बाद उसे सिविल हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया. वहां भर्ती नहीं किया और वापस मेडिकल कॉलेज भेज दिया. वह रास्ते में एक प्राइवेट हॉस्पिटल पहुंचा तो उसने ऑक्सीजन और बेड नहीं होने की बात कहकर मना कर दिया. जब मेडिकल कॉलेज पहुंचे तो तो कोई डाक्टर देखने नहीं आया और एम्बुलेंस में ही बच्ची की मौत हो गयी.

जांच समिति गठित

मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ सचिन माहुर ने बताया कि राजा बेटी नाम की महिला कल रात में अस्पताल आई थी. उनकी हालत ठीक नहीं थी. सुबह ऑपरेशन कर बच्चा हुआ, लेकिन उसकी भी हालत ठीक नहीं थी. इसलिए, बच्ची को सिविल हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया. वहां पर शायद वह भर्ती नहीं हो पाई. प्रिंसिपल डॉ. मयंक वर्मा ने कहा कि इस मामले में जांच समिति गठित कर दी गई है.

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5 घंटे तक भटकता रहा बीमार नवजात का पिता, मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल ने बना दिया फुटबॉल



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