टमाटर की खेती में भारी नुकसान! 1 बीघा में 5 हजार की भी कमाई नहीं, मजबूरी में जोतनी पड़ी फसल
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बाराबंकी में टमाटर की खेती से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है. दाम गिरने और मांग कम होने से लागत भी नहीं निकल पा रही. किसान मजबूरी में फसल जोतकर दूसरी फसल लगा रहे हैं.
किसनो की लागत भी निकाल पाना मुश्किल
हाइलाइट्स
- टमाटर की कीमतों में गिरावट से किसानों को भारी नुकसान.
- दाम गिरने से लागत भी नहीं निकल पा रही.
- किसान मजबूरी में फसल जोतकर दूसरी फसल लगा रहे हैं.
बाराबंकी: कभी टमाटर की खेती से अच्छा मुनाफा कमाने वाले किसानों को अब भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है. जिले में बड़े पैमाने पर टमाटर की खेती की जाती थी, जिससे किसानों को अच्छी आमदनी होती थी, लेकिन इस बार हालात उलट हो गए हैं. बाजार में टमाटर की मांग कम होने और दाम गिरने से किसानों की फसल लागत भी नहीं निकल पा रही है. हालात इतने खराब हो गए हैं कि किसान मजबूरी में अपनी खड़ी फसल जोतने को मजबूर हैं.
बाराबंकी जिले में किसान जायद के मौसम में भी टमाटर की खेती करते हैं, जो अप्रैल से जून तक रहती है. लेकिन इस साल फरवरी-मार्च में तापमान बढ़ने से टमाटर की फसल समय से पहले ही पक गई, जिससे बाजार में टमाटर की अधिक आवक हो गई और दाम गिर गए. जहां पिछले साल एक बीघा खेत से किसान को 50 से 60 हजार रुपये तक की आमदनी हो रही थी, वहीं इस बार 5 हजार रुपये कमाना भी मुश्किल हो गया है.
दाम इतने कम कि मजदूरी भी नहीं निकल रही
टमाटर की खेती करने वाले किसानों ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि इस बार उनकी फसल तो अच्छी हुई थी, लेकिन दाम इतने गिर गए हैं कि तोड़ाई का खर्च भी नहीं निकल पा रहा. एक कैरेट (25 किलो) टमाटर की कीमत सिर्फ 40-50 रुपये मिल रही है, यानी टमाटर का औसत भाव 2 रुपये प्रति किलो तक आ गया है. जबकि एक कैरेट तोड़ने और वाहन में लादने में ही 35 रुपये का खर्च आ जाता है.
मजबूरी में खेत जोतकर लगा दी दूसरी फसल
कम कीमत के चलते किसानों को फसल छोड़नी पड़ रही है. कुछ किसानों ने तो अपनी तैयार फसल को जोतकर दूसरी फसल लगा दी है. उनका कहना है कि इस बार लागत निकाल पाना भी मुश्किल हो गया है. अगर यही हाल रहा तो आगे टमाटर की खेती करना नामुमकिन हो जाएगा.