‘टूट जाती थी शादियां’, हर घर नल योजना ने बदली चित्रकूट के पाठा की सूरत, कभी 1-1 बूंद के लिए तरसे लोग, देखें ग्राउंड रिपोर्ट

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‘टूट जाती थी शादियां’, हर घर नल योजना ने बदली चित्रकूट के पाठा की सूरत, कभी 1-1 बूंद के लिए तरसे लोग, देखें ग्राउंड रिपोर्ट


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चित्रकूट के पाठा में लागू हुई ‘हर घर नल योजना’ ने गांवों की तस्वीर बदल दी है. लोकल 18 की टीम जब केकरामार, रानीपुर कुबरी, ऐलहा बढ़ेया, रानीपुर और आसपास के गांवों में पहुंची तो एक अलग ही नजारा देखने को मिला. घरों के बाहर लगे नल से महिलाएं आराम से बाल्टी भर रही थीं. कहीं बच्चे खुद टोंटी खोलकर नहाते हुए नजर आए. ये दृश्य भले ही देश के किसी दूसरे हिस्से के लिए नए न लगें, लेकिन चित्रकूट के इस इलाके लिए दुर्लभ हैं. ऐसा क्यों है, आइये जानते हैं.

चित्रकूट. यूपी के चित्रकूट का पाठा क्षेत्र कभी गर्मियों में पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसता था. मार्च अप्रैल की शुरुआत होते ही यहां के गांवों में सुबह का मतलब हाथ में बाल्टी, सिर पर डिब्बा और साइकिल पर बंधे ड्रम होता था. महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग कई किलोमीटर दूर जंगलों के बीच बने कुओं और सूखते तालाबों की ओर निकल पड़ते थे, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. जिन गांवों में कभी पानी की काफी ज्यादा समस्या थी, वहां अब घर-घर टोंटी से पानी बह रहा है. पाठा क्षेत्र में लागू हुई ‘हर घर नल योजना’ ने गांवों की तस्वीर ही बदल दी है. लोकल 18 की टीम जब केकरामार, रानीपुर कुबरी, ऐलहा बढ़ेया, रानीपुर और आसपास के गांवों में पहुंची तो एक अलग ही नजारा देखने को मिला. घरों के बाहर लगे नल से महिलाएं आराम से बाल्टी भर रही थीं. कहीं बच्चे खुद टोंटी खोलकर नहाते हुए नजर आए.

इतने खराब थे हालात

ऐलहा बढ़ेया गांव के बुजुर्ग बाबू लाल लोकल 18 से बताते हैं कि पहले हम एक-एक बूंद पानी के लिए रात भर कुएं के पास या हैंडपंप के पास बैठे रहते थे. गड्ढे में पानी भरने के बाद उसे हम गिलास या लोटे से बाल्टी में भरते थे और घर लाकर छानकर पीते थे. इतनी समस्या थी कि पानी के कारण हम दूसरे काम करने नहीं जा पाते थे. सिर्फ पानी में ही पूरा दिन या रात निकल जाता था. जब से हमारे घर के बाहर पाइप से पानी आने लगा है, हमारी जिंदगी में काफी बदलाव आए हैं. अब हम लोगों को पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ता है. आसानी से साफ पानी पीते हैं जिससे बीमारियां भी नहीं होती हैं.

पाठा क्षेत्र के टीकुरी गांव की ननकी देवी बताती हैं कि पहले पानी लेने के लिए हम लोगों को घंटों पैदल चलकर जंगल में बने कुएं या तालाब में जाना पड़ता था. गर्मी के समय में इंतजार करना पड़ता था कि कुएं में पानी आए तो हम अपने बर्तनों में भरें. मजबूरी में गंदा पानी बर्तनों में भरकर घर लाना पड़ता था. उसी पानी को हम नहाने के साथ-साथ घर के अन्य कार्यों में भी उपयोग करते थे. इससे बीमारियां भी फैलती थीं. लेकिन जब से हर घर नल योजना के तहत हमारे गांव में पानी आया है, हमें इस समस्या से निजात मिल गई है. अब हमें कहीं दूर पानी लेने नहीं जाना पड़ता है. आसानी से साफ पानी घर में ही मिल जाता है.

क्या बोले अधिकारी

जल निगम के अधिशासी अभियंता अशीष कुमार भारती ने लोकल 18 को बताया कि पाठा क्षेत्र में पहले पानी की समस्या विकराल थी. कई बार तो पानी के कारण लोगों की शादियां तक टूट जाती थीं. लेकिन हर घर नल योजना के तहत अब हम पाठा क्षेत्र के पठारी गांव में भी पानी पहुंचा रहे हैं. पानी के लिए दूर दराज भटकना नहीं पड़ता है. इस योजना के बाद लोग स्वच्छ पानी पा रहे हैं.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें



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