ट्रेंच विधि से करना चाहते हैं गन्ने की बुवाई? रखें इन 4 बातों का ध्यान… बंपर होगी पैदावार
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Sugarcane Farming Tips, अगर आप ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई करने की सोच रहे हैं, तो इस समय आपके लिए सुनहरा मौका है. सही तकनीक और थोड़ी सावधानी से आप फसल की उपज में जबरदस्त बढ़ोतरी कर सकते हैं. बस बुवाई के वक्त आपक इन 4 अहम बातों का ध्यान रखना होगा.
आजमगढ़ : धान की कटाई के बाद ज्यादातर किसान गेहूं की बुवाई की ओर रुख करते हैं, लेकिन अक्टूबर और नवंबर का महीना गन्ने की खेती के लिए भी बेहद अनुकूल माना जाता है. इस समय की गई गन्ने की बुवाई किसानों को करीब 20% अधिक उत्पादन दे सकती है. शरदकालीन गन्ना न केवल बेहतर पैदावार देता है, बल्कि इसकी लागत भी अपेक्षाकृत कम होती है. हालांकि, इस मौसम में गन्ने की खेती करने वाले किसानों को अपनी फसल की सुरक्षा और देखभाल पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि रोगों और कीटों से बचाव करते हुए अधिक उपज प्राप्त की जा सके.
कृषि विशेषज्ञ डॉ. राकेश वर्मा ने बताया कि नवंबर महीने में की गई शरदकालीन गन्ने की बुवाई किसानों के लिए बेहद लाभदायक साबित होती है. इस मौसम में बोया गया गन्ना बेहतर उत्पादन देता है और रोगों का खतरा भी कम रहता है. बुवाई से पहले किसानों को खेत की गहरी जुताई कर इसे समतल बना लेना चाहिए. इसके बाद ट्रेंच विधि अपनाते हुए प्रति हेक्टेयर 10 टन सड़ी हुई गोबर की खाद का प्रयोग करें. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसल को शुरुआती वृद्धि के लिए आवश्यक पोषण मिलता है।
इन बातों का रखें ध्यान
गन्ने की बुवाई करते समय किसानों को खास सावधानी बरतनी चाहिए. गन्ने की कतारों के बीच लगभग 4 फीट की दूरी रखनी चाहिए, वहीं बीज को 15 से 20 सेंटीमीटर की गहराई में बोना चाहिए ताकि जमाव अच्छा हो सके.बुवाई के दौरान प्रति हेक्टेयर 100 किलोग्राम यूरिया और 500 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट का उपयोग आवश्यक है. साथ ही, बीज का चयन बेहद महत्वपूर्ण होता है. किसानों को हमेशा स्वस्थ और रोगमुक्त खेतों से गन्ने का बीज लेना चाहिए. क्योंकि गन्ने में लाल सड़न रोग और कवक जनित बीमारियों का खतरा अधिक होता है, इसलिए सही बीज चयन और बुवाई की उचित तकनीक से ही बेहतर उत्पादन सुनिश्चित किया जा सकता है.
मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें
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