ठंड में दर्द; हाथ में अन्न लिया हूं साहब झूठ नहीं…न सहारा, न घर, खुला आसमान, आज तक किसी ने नहीं ली सूद, जाने बाढ़ पीड़ितों की दर्दनाक हकीकत

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ठंड में दर्द; हाथ में अन्न लिया हूं साहब झूठ नहीं…न सहारा, न घर, खुला आसमान, आज तक किसी ने नहीं ली सूद, जाने बाढ़ पीड़ितों की दर्दनाक हकीकत



Hope for a roof : बलिया में गंगा की भीषण बाढ़ के बाद उजड़े परिवार अब कड़ाके की ठंड से जूझ रहे हैं. सड़क किनारे खुले आसमान के नीचे रह रहे इन लोगों के लिए हर रात एक संघर्ष बन गई है. छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी ठंड और भूख की दोहरी मार झेल रहे हैं, जबकि मदद अब भी दूर नजर आ रही है.



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