डरावनी शक्ल में आते हैं मौत के फरिश्ते, जो इंसान के आखिरी वक्त में देते हैं उसे अच्छे और बुरे कर्मों की सजा

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डरावनी शक्ल में आते हैं मौत के फरिश्ते, जो इंसान के आखिरी वक्त में देते हैं उसे अच्छे और बुरे कर्मों की सजा


अलीगढ़: इस्लाम में मौत को जीवन का अटल सत्य माना गया है, जिसे हर इंसान को चखना ही है. उत्तर प्रदेश के चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन बताते हैं कि अल्लाह ने किस तरह मृत्यु का पूरा नियम तय किया है कि मौत की ज़िम्मेदारी मलकुल मौत यानी हज़रत इज़राइल अलैहिस्सलाम को दी गई है. इंसान के नेक और बुरे कर्म ही तय करते हैं कि उसकी रूह (आत्मा) आसानी से कब्ज़ा की जाएगी या फिर बड़े कष्ट और सख्ती के साथ.

हर जानदार के लिए एक वक्त मुकर्रर

मौलाना इफराहीम ने कहा कि इस्लाम में यह साफ है कि इस दुनिया के हर जानदार को मौत का जायका चखना है. अल्लाह ने हर जानदार के लिए एक वक्त मुकर्रर किया है उसे कब दुनिया में आना है और कब दुनिया से जाना है. यह पूरा निजाम, जिसमें मौत का समय, स्थान और तरीका शामिल है, अल्लाह की तरफ से पहले से तय होता है. ​जब किसी की ज़िंदगी का समय पूरा हो जाता है, तो इस काम के लिए अल्लाह ने मलकुल मौत को मुकर्रर किया है. फ़रिश्ते का नाम लें, तो हज़रत इज़राइल अलैहिस्सलाम को इस ड्यूटी के लिए नियुक्त किया गया है.

कर्मों पर तय होती है मौत 

​मौलाना ने कहा कि नेक लोगों के लिए मौत एक ऐसा पैगाम है जो इंसानों के आमाल यानी कर्मों पर निर्भर करता है. वे लोग जिन्होंने अल्लाह के आदेशों का पालन किया है, पैगम्बरों के संदेशों की इत्तेबा की है, नेकनीयती से इंसाफ किया है, अच्छे काम किए हैं और बुराइयों से बचे हैं, ऐसे लोगों की मौत बहुत ही आसानी के साथ होती है. फरिश्ते बड़ी नरमी से उनकी जान निकालते हैं. उनकी रूह यानी आत्मा का बड़ा एहतमाम किया जाता है. उसे खुशबू के कपड़े से लपेटकर बड़ी इज़्ज़त के साथ ले जाया जाता है.

पापियों के लिए डरावनी शक्ल में आते हैं फरिश्ते

वे लोग जो अल्लाह की मर्जी के खिलाफ चले, जिन्होंने ज़ुल्म, नाइंसाफी और हक़तल्फ़ियाँ कीं, और अल्लाह के आदेशों की अवहेलना की, उनके साथ मामला अलग होता है. ऐसे लोगों की रूह को कब्ज़ा करने के लिए आने वाले फ़रिश्ते बड़ी डरावनी शक्ल में आते हैं. उनकी रूह बड़ी सख्ती के साथ कब्ज़ा की जाती है. ​इस दर्द की तुलना ऐसे की गई है जैसे ​एक कांटेदार पेड़ से किसी कपड़े को खींचकर निकाला जाए और वह चिर जाता है. ऐसे ही उनकी रूह निकाली जाएगी. खासकर ​जो लोग झूठे, मक्कार, धोखेबाज रहे होंगे, जिन्होंने अल्लाह की ताकत को नहीं माना होगा और दुनिया में इंसाफ कायम नहीं किया होगा, ऐसे लोग मौत के इस डरावने जायके को चखेंगे.



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