ताजमहल से कम नहीं कानपुर के इस अस्पताल की प्रेम कहानी! अंग्रेजी अफसर के मोहब्बत की बयां करती कहानी
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Kanpur Love Story: ताजमहल की प्रेम कहानी तो आपने जरूर सुनी होगी, लेकिन आज आपको कानपुर के एक अस्पताल की अनोखी प्रेम कहानी बताने वाले हैं, जो ताजमहल से कम नहीं है. अग्रेंजी अफसर ने अपनी पत्नी की याद में एक अस्पताल बनवाया था. यह अस्पताल इस प्रेम निशानी पर आज भी कानपुर की लोगों की सेवा कर रहा है.
कानपुर का सबसे बड़ा जिला अस्पताल उर्सुला अस्पताल है. इसे अभी तक हम सिर्फ एक अस्पताल के रूप में जानते थे, लेकिन आज हम आपको इसकी कहानी बताएंगे, तो आप हैरान रह जाएंगे. प्रेम की निशानी के रूप में अभी तक सिर्फ ताजमहल को जानते थे, लेकिन कानपुर का यह अस्पताल भी एक प्रेम कहानी समेटे हुए है. एक अंग्रेजी अफसर ने अपनी पत्नी को एक विमान हादसे में खोने के बाद अपने सरकारी बंगले को दान दे दिया था और वहां पर अस्पताल खोल दिया था. यह अस्पताल इस प्रेम निशानी पर आज भी कानपुर की लोगों की सेवा कर रहा है.

कानपुर के बड़े चौराहे के पास खड़ी उर्सुला हॉर्समैन मेमोरियल अस्पताल की इमारत मोहब्बत की एक मिसाल है. ब्रिटिश अधिकारी अल्बर्ट हॉर्समैन की पत्नी उर्सुला से बेपनाह मोहब्बत करते थे. उर्सुला सिर्फ उनकी पत्नी ही नहीं, बल्कि उनकी प्रेरणा भी थी. अचानक विमान हादसे में पत्नी की मृत्यु ने अल्बर्ट को तोड़ दिया. मगर पत्नी की मृत्यु पर उन्होंने आंसुओं में डूबने के बजाय अपने प्रेम को अमर करने का रास्ता चुना और यह अस्पताल बनवा दिया. अपने बंगले में इस अस्पताल पर आज भी उनकी फोटो, उनकी पत्नी की फोटो लगी हुई है, जो आज भी उस प्रेम कहानी की गाथा गाती है.

26 फरवरी 1937 को अल्बर्ट हॉर्समैन ने अपने उसे सरकारी बंगले में जहां उनकी पत्नी उर्सला अल्बर्ट के साथ समय व्यतीत करती थी, वहां पर उन्होंने अपने उसी बंगले को उर्सला हॉर्समैन मेमोरियल अस्पताल की स्थापना करके अमर कर दिया. यह किसी शासक का आदेश नहीं था, बल्कि एक पति के टूटे दिल से निकला हुआ फैसला था. यह कानपुर का एक अपना अलग ताजमहल था. यह संगमरमर का नहीं, बल्कि सेवा, त्याग और प्रेम से बना हुआ लोगों की सेवा करने का एक स्थान बन गया है.
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कभी कानपुर के इस अस्पताल की शुरुआत सिर्फ दो कमरे से हुई थी. आज यहां पर 550 बेड का विशाल मंडली चिकित्सालय बन गया है. आज यहां पर कार्डियक यूनिट 1 यूनिट डायलिसिस यूनिट ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मॉड्यूल ऑपरेशन थिएटर और अत्यधिक पैथोलॉजी जैसी सुविधाएं उपलब्ध है. यहां पर शुरू होती हर नई सुविधा से यह मालूम होता है कि अभी भी अल्बर्ट हॉर्समैन और उर्सुला हॉर्समैन का प्रेम और मजबूत हो रहा है.

अस्पताल में प्रवेश करते ही यहां पर एक अलग सुकून महसूस होता है. शायद इसके पीछे की वजह यह है कि इसकी न्यू पत्थरों पर नहीं, बल्कि भावनाओं पर रखी गई थी. यही वजह है कि आज भी डॉक्टर और नर्स बड़े प्रेम से मरीजों का इलाज करते हैं और उनके दर्द को समझते हैं. अस्पताल में आज भी उर्सुला की स्मृति में हर वर्ष स्थापना दिवस मनाया जाता है. हर साल 26 फरवरी को यहां पर कुछ प्रेम को याद किया जाता है. प्रेम की अमर गाथा में इस अस्पताल का निर्माण कराया गया था.