दादा ले, पोता बरते! 400 साल पुराना हुनर…स्पोर्ट्स सिटी के साथ अब ‘कैंची सिटी’ भी बना मेरठ, दुनिया भर में होती है सप्लाई

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दादा ले, पोता बरते! 400 साल पुराना हुनर…स्पोर्ट्स सिटी के साथ अब ‘कैंची सिटी’ भी बना मेरठ, दुनिया भर में होती है सप्लाई


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Scissor Industry Meerut: क्रांति-धरा मेरठ न सिर्फ खेल उद्योग के लिए मशहूर है, बल्कि यहां की 400 साल पुरानी कैंची इंडस्ट्री भी देश-विदेश में अपनी पहचान बनाए हुए है. आखून परिवार द्वारा शुरू किया गया यह उद्योग आज हजारों परिवारों की आजीविका का साधन है. मेरठ में 70 से अधिक प्रकार की कैंचियां तैयार होती हैं, जो अपनी गुणवत्ता और टिकाऊपन के लिए दुनिया भर में जानी जाती हैं.

क्रांति-धरा मेरठ की बात करें तो यह शहर उद्योग के क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान रखता है. स्पोर्ट्स इंडस्ट्री के साथ-साथ मेरठ की कैंची की मांग भी न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी देखी जाती है. करीब 400 साल पुराना यह उद्योग आज भी अपनी क्वालिटी और कारीगरी के लिए मशहूर है.

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मेरठ कैंची उद्योग से जुड़े जुबैर बताते हैं कि लगभग 400 साल पहले आखून परिवार ने इस कला की शुरुआत की थी. पुराने जमाने में वे पुरानी गाड़ियों और पीतल के खराब हिस्सों को पिघलाकर कैंची तैयार करते थे. इन कैंचियों का इस्तेमाल लोहे की विभिन्न वस्तुएं काटने में किया जाता था, और यह प्रयोग बेहद सफल साबित हुआ.

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समय के साथ यह कला उद्योग में बदल गई. आज मेरठ की बनी कैंची की पहचान भारत ही नहीं, बल्कि जापान, चीन, अमेरिका समेत कई देशों में है. यहां से हर साल हजारों कैंचियां देश-विदेश में सप्लाई की जाती हैं.

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जुबैर के अनुसार, मेरठ में एक नहीं बल्कि 70 से अधिक प्रकार की कैंचियां तैयार की जाती हैं. इनकी कीमत ₹5 से लेकर ₹10,000 तक होती है. यहां नाई, दर्जी, बुनकर और कारखाने में इस्तेमाल होने वाली हर प्रकार की कैंची बनाई जाती है.

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आज-कल बाजारों में जापान और चीन की कैंचियां जरूर मिलती हो, लेकिन मेरठ की कैंची लोगों के बीच आज भी अपनी मजबूती और धार के लिए जानी जाती है. यहां के कुशल कारीगर आज भी हाथ से कैंची बनाते हैं, यही इसे अनोखा बनाता है.

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मेरठ की कैंचियों के बारे में कहा जाता है ‘दादा ले, पौता बरते’ यानी यह पीढ़ियों तक चलती हैं. ये कैंचियां आसानी से रिपेयर होकर दोबारा नई जैसी बन जाती हैं, इसलिए नई कैंची खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती.

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कैंची तैयार करना आसान काम नहीं. एक कैंची बनाने में 12 से 15 कारीगरों की मेहनत लगती है. कोई इसे आकार देता है, कोई धार लगाता है, और कोई इसे फिनिशिंग देता है- तब जाकर एक परफेक्ट कैंची तैयार होती है.

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आज मेरठ में हजारों परिवार इस उद्योग से जुड़े हुए हैं. सुबह से लेकर शाम तक कारीगर अपने घरों या छोटे-छोटे कारखानों में मेहनत करते हैं. उनकी कारीगरी ही है, जिसने मेरठ की कैंची को चार सौ साल बाद भी धारदार बनाए रखा है.

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400 साल पुराना हुनर…स्पोर्ट्स सिटी के साथ अब ‘कैंची सिटी’ भी बना मेरठ



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