दीपावली का पावन पर्व, मां मंदाकिनी नदी में दीपदान के लिए आते है श्रद्धालु
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Chitrakoot News: मुखी हनुमान मंदिर के पुजारी मोहित दास बताते हैं कि भगवान श्रीराम ने माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ चित्रकूट में 11 वर्ष 6 माह का समय बिताया था. जब वे लंका विजय के बाद लौटे तो यहां के साधु-संतों से मिलकर मां मंदाकिनी में दीपदान किया. वे सदैव चित्रकूट में निवास करेंगे. आज भी उसी आस्था और श्रद्धा के साथ लाखों भक्त चित्रकूट पहुंचकर दीपदान करते हैं.
चित्रकूट दीपावली का पर्व नजदीक है. इस पावन अवसर पर दीपदान करने का विशेष महत्व माना गया है. धर्म नगरी चित्रकूट में दीपदान का पर्व किसी उत्सव से कम नहीं होता है. यहां हर साल लाखों श्रद्धालु देश के कोने-कोने से पहुंचते हैं. रामघाट के तट पर मां मंदाकिनी नदी में दीपदान कर भगवान श्रीराम से अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं.
मंदाकिनी नदी में श्री राम ने किया था दीपदान
प्रभु श्रीराम लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम पुनः चित्रकूट लौटे थे. उन्होंने मां मंदाकिनी नदी में साधु-संतों और स्थानीय लोगों के साथ दीपदान किया,जिससे यह परंपरा सदियों से चलती आ रही है. तभी से दीपावली पर चित्रकूट में दीपदान करने की परंपरा को विशेष रूप से जीवंत रखा गया है.और हर साल यहां लाखों भक्त आते है.
पुजारी ने जानकारी
इस संबंध में तोता मुखी हनुमान मंदिर के पुजारी मोहित दास बताते हैं कि भगवान श्रीराम ने माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ चित्रकूट में 11 वर्ष 6 माह का समय बिताया था. जब वे लंका विजय के बाद लौटे तो यहां के साधु-संतों से मिलकर मां मंदाकिनी में दीपदान किया. वे सदैव चित्रकूट में निवास करेंगे. आज भी उसी आस्था और श्रद्धा के साथ लाखों भक्त चित्रकूट पहुंचकर दीपदान करते हैं. भक्त पहले मां मंदाकिनी में स्नान कर शुद्ध होकर दीप प्रज्वलित करते हैं और रामघाट पर दीपों की अद्भुत श्रृंखला सजती है, पूरा घाट सुनहरी रोशनी से जगमगा उठता है मानो स्वयं प्रभु श्रीराम वहां विराजमान हुए हो.