देश की सुरक्षा सिर्फ सैनिकों का काम नहीं, राजनाथ सिंह ने क्यों कहा ऐसा?
रक्षा मंत्री ने शनिवार को कहा कि जिस तरह की परिस्थितियां अभी चल रही हैं, और जिस तरह की परिस्थितियां भविष्य में आने वाली हैं, उसे देखते हुए, यह बात तो तय है, कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल हमारे सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं है. यह एक सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसमें हम सभी नागरिक बराबर के भागीदार हैं.
राजनाथ सिंह ने कहा, “राष्ट्र की सुरक्षा केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि समाज के भीतर भी ensure होती है. अगर देश के अंदर एकता, अनुशासन और जागरूकता नहीं है, तो बाहरी सुरक्षा भी कमजोर पड़ जाती है.”
उन्होंने कहा, “हम और आप जैसे, सामान्य नागरिकों की भूमिका, यहां बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है. जब हम कानून का पालन करते हैं, जब हम अफवाहों से दूर रहते हैं, जब हम देश के हित को, व्यक्तिगत हित से ऊपर रखते हैं, तब हम एक तरह से, राष्ट्रीय सुरक्षा में अपना योगदान ही दे रहे होते हैं.”
राष्ट्रीय सुरक्षा एक ऐसा विषय है, जिसमें कोई भी व्यक्ति निष्क्रिय नहीं रह सकता. सैनिक सीमा पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन देश के भीतर हमें, यानी नागरिकों को और मीडिया को, अपनी जिम्मेदारी उतनी ही गंभीरता से निभानी होगी. सरकार के रूप में, हम भी इस जिम्मेदारी को गंभीरता से निभा रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के किसी भी मुद्दे पर, हमारी सरकार कोई भी समझौता नहीं करती.
हमारे लिए भारत की संप्रभुता, और अपने सैनिकों का गौरव सर्वोपरि है. हमने अपने सैनिकों की, स्मृतियों को भी संजोने के अनेक प्रयास किये हैं, जिससे आप सभी परिचित हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने, अंडमान और निकोबार के 21 द्वीपों का नाम देश की शान, परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखा है. यह हमारे सभी सैनिकों, एवं पूर्व-सैन्य कर्मियों के साहस और बलिदान के प्रति, सच्ची श्रद्धांजलि है.