दो साल से इकठ्ठा कर रहे थे विस्फोटक.. कई शहर थे निशाने पर, डॉ शाहीन का खुलासा

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दो साल से इकठ्ठा कर रहे थे विस्फोटक.. कई शहर थे निशाने पर, डॉ शाहीन का खुलासा


लखनऊ. उत्तर प्रदेश, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में फैले एक खतरनाक आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश होते ही सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गई हैं. फरीदाबाद से गिरफ्तार लखनऊ की महिला डॉक्टर शाहीन शाहिद ने पूछताछ के दौरान हैरान करने वाले खुलासे किए हैं. जम्मू-कश्मीर पुलिस की हिरासत में शाहीन ने कबूल किया कि वह पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के लिए काम कर रही थी. उसके मुताबिक, संगठन के अन्य सदस्य पिछले दो सालों से विस्फोटकों का जखीरा इकट्ठा कर रहे थे, ताकि दिल्ली, लखनऊ और अन्य प्रमुख शहरों में बड़े धमाके किए जा सकें. इस खुलासे ने राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को झकझोर दिया है.

जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक डॉ. शाहीन शाहिद, जो कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज (GSVM) की पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर रह चुकी हैं, जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग ‘जमात-उल-मोमिनात’ की प्रमुख सदस्य थीं. यह विंग पाकिस्तान में जैश प्रमुख मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर द्वारा संचालित है. शाहीन का काम भारत में महिलाओं को रेडिकलाइज कर आतंकी गतिविधियों में भर्ती करना था. पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल के जरिए हथियारों और विस्फोटकों की आपूर्ति सुनिश्चित कर रही थी.

डॉ. उमर नबी सबसे कट्टर

पुलिस सूत्रों के अनुसार, शाहीन की गिरफ्तारी 9 नवंबर को फरीदाबाद से हुई, जब उसकी कार से एक AK-47 राइफल, जिंदा कारतूस और संदिग्ध सामग्री बरामद की गई. वह गिरफ्तार डॉ. मुजम्मिल की गर्लफ्रेंड और मुख्य सहयोगी थी. शाहीन ने खुलासा किया कि मुजम्मिल, सहारनपुर से पकड़े गए डॉ. आदिल और दिल्ली ब्लास्ट के कथित फिदायीन डॉ. उमर नबी मिलकर कई धमाकों की योजना बना रहे थे. डॉ. उमर को सबसे कट्टर बताया गया, जो अक्सर ‘धमाकों की तैयारी’ पर चर्चा करता था. शाहीन ने यह भी माना कि दिल्ली के लाल किले के पास हालिया कार ब्लास्ट इसी मॉड्यूल से जुड़ा हो सकता है, जिसमें 10 लोगों की मौत हुई थी.

दो साल से इकठ्ठा कर रहे थे विस्फोटक

खुलासे के अनुसार, यह मॉड्यूल पिछले दो वर्षों से फरीदाबाद के दिहाड़ी मजदूरों के घरों में विस्फोटक छिपाकर जमा कर रहा था. अब तक की छापेमारी में 2,900 किलो से अधिक IED सामग्री, हथियारों का जखीरा और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हो चुके हैं. शाहीन ने बताया कि दिल्ली के अलावा लखनऊ, कानपुर, अलीगढ़ और श्रीनगर जैसे शहर निशाने पर थे. निशाने धार्मिक स्थल, बाजार और सरकारी इमारतें थीं. यह नेटवर्क जैश-ए-मोहम्मद के साथ-साथ अंसार गजवात-उल-हिंद से भी जुड़ा था, और पाकिस्तान से फंडिंग व निर्देश मिल रहे थे.

शाहीन का ‘व्हाइट कॉलर’ बैकग्राउंड

जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक, “शाहीन का ‘व्हाइट कॉलर’ बैकग्राउंड इस मॉड्यूल को और खतरनाक बनाता था. पढ़े-लिखे पेशेवरों का इस्तेमाल रिक्रूटमेंट और लॉजिस्टिक्स के लिए किया जा रहा था.” गिरफ्तारियों की संख्या अब आठ हो चुकी है, जिसमें शाहीन का भाई डॉ. परवेज शाहिद अंसारी भी शामिल है, जिसे यूपी ATS ने इंटीग्रल यूनिवर्सिटी से रिजाइन करने के एक हफ्ते बाद हिरासत में लिया. परवेज पर फंडिंग और संपर्कों में सहयोग का शक है.

जांच का दायरा बढ़ा

इस खुलासे के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और यूपी ATS ने संयुक्त जांच शुरू कर दी है. शाहीन के बैंक ट्रांजेक्शन, कॉल रिकॉर्ड और जम्मू-कश्मीर यात्राओं की पड़ताल हो रही है. सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली कार ब्लास्ट और फरीदाबाद मॉड्यूल के बीच सीधा लिंक मिला है. कश्मीर में 19 अक्टूबर को लगे जैश के धमकी भरे पोस्टरों से इस साजिश की शुरुआत हुई थी.



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