नई तकनीक के कारण मुरादाबाद में सील पत्थर का चलन हुआ कम, कारीगरों की बिक्री…

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नई तकनीक के कारण मुरादाबाद में सील पत्थर का चलन हुआ कम, कारीगरों की बिक्री…


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नई तकनीक के कारण मुरादाबाद में सील पत्थर का चलन कम हो गया है, जिससे कारीगरों की बिक्री घट गई है. कुलदीप, जो पीढ़ियों से यह काम कर रहे हैं, अब मुश्किल से 3 सील पत्थर बेच पाते हैं.

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सिल पत्थर के काम मे आई गिरावट.

हाइलाइट्स

  • नई तकनीक से मुरादाबाद में सील पत्थर का चलन कम हुआ.
  • कुलदीप अब मुश्किल से 3 सील पत्थर बेच पाते हैं.
  • सील पत्थर 250 से 350 रुपये तक में मिलते हैं.

मुरादाबाद: आजकल जैसे-जैसे नई तकनीकें आ रही हैं, लोग उनका उपयोग करके अपना काम आसान बना रहे हैं. इस वजह से कई पुरानी चीजें पीछे छूटती जा रही हैं, जैसे कि सील पत्थर. अब सील पत्थर का चलन कम होता जा रहा है क्योंकि लोग इलेक्ट्रॉनिक मिक्सी मशीन का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं. इससे उन कारीगरों को बहुत परेशानी हो रही है जो सिर्फ़ सील पत्थर बनाते हैं. उनकी बिक्री बहुत कम हो गई है क्योंकि अब लोग सील पत्थर का इस्तेमाल कम ही करते हैं.

वर्षों से कर रहे है सील पत्थर का काम
कुलदीप, जो सील पत्थर बनाते हैं, ने बताया कि उनके परिवार में कई पीढ़ियों से यह काम चला आ रहा है. वे मुरादाबाद के संभल चौराहे पर अपनी दुकान चलाते हैं. लेकिन जब से इलेक्ट्रॉनिक मिक्सी आई है, उनका काम बहुत कम हो गया है. पहले जहाँ उनके 10 से ज्यादा सील पत्थर बिक जाते थे, वहीं अब मुश्किल से 3 ही बिक पाते हैं.

अलग-अलग है कीमत
ये सिलबट्टे 250, 300, 350 रुपये तक में मिल जाते हैं. पर आजकल हमारा काम धीरे-धीरे कम होता जा रहा है. इससे हमारी रोजी-रोटी मुश्किल में पड़ रही है. हालात ठीक नहीं हैं. हम आपसे यही कहेंगे कि आप सिलबट्टे पर पिसे मसाले ही खाएं. इससे आपकी सेहत अच्छी रहेगी. सिलबट्टे पर मसाले पीसने से आपको मेहनत तो होगी लेकिन आपका शरीर स्वस्थ रहेगा. सिलबट्टे पर पिसे मसाले आपको नुकसान भी नहीं पहुंचाएंगे. इसलिए ज़्यादा से ज़्यादा लोग सिलबट्टे का इस्तेमाल करें और स्वस्थ रहें.

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