नन्हे होनहारों ने तैयार कर दिया मात्र 2000 रुपए का ड्रोन, खेती से लेकर डिफेंस तक को दे सकता है ताकत
आजमगढ़: प्रतिभा किसी संसाधन या उम्र की मोहताज नहीं हो सकती, बड़े बुजुर्गों की ओर से कही गई इस कहावत को आजमगढ़ के नन्हे होनहार वैज्ञानिकों ने एक बार फिर से सच साबित कर दिखाया है. आजमगढ़ में महज कक्षा 8 में पढ़ने वाले बच्चों ने पॉकेट मनी से भी कम खर्चे में ड्रोन का एक ऐसा मॉडल तैयार कर दिखाया है, जिसे बड़ी-बड़ी कंपनियां बनाने में लाखों रुपए खर्च करती हैं. ड्रोन टेक्नोलॉजी को जहां एक बेहद महंगा और खर्चीली मॉडल समझा जाता है, वही आजमगढ़ के इन होनहार बच्चों ने इस मॉडल को बनाकर यह साबित कर दिखाया है कि कम संसाधन और बेहतर तकनीक के दम पर कम पैसों में भी अच्छी चीज हासिल की जा सकती है.
यह कारनामा आजमगढ़ जिले के हरिशचंद्र मिश्रा पब्लिक स्कूल (एचएमपीएस) के कक्षा आठ में पढ़ने वाले दो छात्रों ने कर दिखाया है, जिन्होंने स्कूली शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अपनी जिज्ञासा के दम पर सस्ते इलेक्ट्रॉनिक चीजों का सही इस्तेमाल करते हुए एक बेहतरीन ड्रोन मॉडल तैयार किया है. यह ड्रोन देखने में तो बेहद साधारण सा दिखाई देता है, लेकिन इसके काम और इसकी तकनीक अपने आप में किसी असाधारण और असली ड्रोन से कम नहीं है. बच्चों का मानना है कि इसे किसी भी प्रोफेशनल ड्रोन की तरह उपयोग किया जा सकता है.
मात्र 2000 के खर्चे में हुआ तैयार
एचएमपीएस स्कूल की आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले उमर और मानस की जोड़ी ने यह बेहतरीन उपलब्धि अपने नाम की है. लोकल 18 की टीम से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि इस ड्रोन को बनाने में केवल 2000 रुपए का खर्चा आया है और स्कूल में ही इसका ब्लू-प्रिंट तैयार करते हुए इलेक्ट्रॉनिक तकनीक की मदद से उन्होंने इसे तैयार किया है. उनका दावा है कि यह मार्केट में मिलने वाले सभी ड्रोन से बेहतर और किफायती है. उनका कहना है कि इस ड्रोन को कोई भी आसानी से खरीद सकता है और इसे किसी भी प्रोफेशनल काम में उपयोग किया जा सकता है. फोटोग्राफी से लेकर किसानों तक के लिए यह बेहद फायदेमंद हो सकता है.
किसानों के लिए भी फायदेमंद
बच्चों का कहना है कि जिस तरीके से आजकल खेती में तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, उस मामले में भी यह किसानों के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है. मार्केट में मिलने वाले ड्रोन किसानों के लिए महंगे होते हैं, ऐसे में इस सस्ते ड्रोन की मदद से किसान अपने खेतों में तकनीक का बेहतर उपयोग कर सकते हैं. किसान अपने खेत में ड्रोन तकनीक का उपयोग करते हुए खेती को आसान बना सकते हैं. इस ड्रोन की मदद से किसान घर बैठे अपने खेतों का रख-रखाव करते हुए बीज आदि का भी छिड़काव अपने बड़े क्षेत्रफल वाले खेत में भी आसानी से कर सकते हैं.
डिफेंस और प्राकृतिक आपदा में भी उपयोगी
बच्चों का मानना है कि यह ड्रोन भविष्य में डिफेंस क्षेत्र में भी बेहद कारगर साबित हो सकता है. भविष्य में ड्रोन के इस मॉडल में और तकनीक जोड़ते हुए इसे और बेहतर बनाया जा सकता है. वहीं इस प्रोजेक्ट को बनाने में बच्चों को तकनीकी रूप से सहायता उपलब्ध कराने और मेंटर करने वाली शिक्षिका हर्षिता सिंह बताती हैं कि फिलहाल बच्चों की ओर से इस ड्रोन मॉडल का एक प्रोटोटाइप तैयार किया गया है, जिसका भविष्य में कई बेहतर तरीके से उपयोग किया जा सकता है. यह ड्रोन मॉडल विशेषकर प्राकृतिक आपदा के समय डिजास्टर मैनेजमेंट में भी बेहद सहायक हो सकता है.
मेक इन इंडिया का भविष्य
ऐसे में सबसे खास बात यह है कि जहां 2000 रुपए में आज की महंगाई के दौर में मार्केट से कोई ब्रांडेड सामान भी नहीं खरीदे जा सकते, वहीं इतने कम खर्च और समिति संसाधन में आजमगढ़ के इन होनहार बच्चों ने एक ऐसा हाईटेक ड्रोन मॉडल तैयार कर दिखाया है, जो न केवल आसमान में उड़ान भर सकता है, बल्कि कई क्षेत्र में लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है और भारत सरकार के मेक इन इंडिया मॉडल को और आगे ले जा सकता है.