नींबू के पेड़ में भर-भरकर चाहिए पैदावार? जानिए पानी, खाद और स्प्रे देने का सही तरीका
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Lemon Farming Tips: नींबू की खेती में सबसे बड़ी समस्या तब आती है जब फल छोटे रह जाते हैं या उनमें रस कम होता है. जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक बताते हैं कि नींबू के पौधों को फल बनते समय जिंक, कॉपर और पोटैशियम जैसे तत्वों की विशेष जरूरत होती है. केवल पानी देना काफी नहीं है; बल्कि सही समय पर सिंचाई और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव ही फलों के आकार को बढ़ाता है.
नींबू के पौधों को फल बनते समय नमी की सख्त जरूरत होती है, लेकिन पानी का जमाव जड़ें सड़ा सकता है. रसदार फल पाने के लिए मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखें. जब ऊपरी मिट्टी एक इंच तक सूख जाए, तभी पानी दें. फूल आने के दौरान पानी कम देना चाहिए, लेकिन एक बार फल सेट हो जाने पर नियमित सिंचाई सुनिश्चित करें ताकि फल अंदर से सूखे न रहें.

जिला उद्यान अधिकारी डॉ पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि फलों का आकार बढ़ाने के लिए केवल खाद काफी नहीं होती है. जिंक और कॉपर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से भी फल छोटे रह जाते हैं. इसके समाधान के लिए जिंक सल्फेट और मैग्नीशियम सल्फेट का मिश्रण तैयार कर पत्तियों पर छिड़काव करें. यह प्रक्रिया पौधों में प्रकाश संश्लेषण को तेज करती है, जिससे फलों को अधिक ऊर्जा मिलती है और उनका आकार तेजी से बढ़ता है.

रस की मात्रा और छिलके की चमक के लिए पोटैशियम और बोरॉन जादू की तरह काम करते हैं. पोटैशियम फलों में शुगर और रस के स्तर को बढ़ाता है, जबकि बोरॉन फलों को फटने से रोकता है. प्रति पौधा 50-100 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश या राख का उपयोग करें. साथ ही, 1 ग्राम बोरेक्स प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से फल रसीले और आकर्षक बनते हैं.
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अगर आप महंगे रसायनों से बचना चाहते हैं, तो अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट का इस्तेमाल करें. फल आने के दौरान पौधे की जड़ों के चारों ओर गुड़ाई करके कंपोस्ट डाल दें. इसमें मौजूद नाइट्रोजन और फास्फोरस पौधों की जड़ों को मजबूती देते हैं. इसके साथ ही ‘सीवीड लिक्विड’ का इस्तेमाल फलों के वजन को बढ़ाने में बहुत प्रभावी साबित होता है.

पौधे की ऊर्जा का सही दिशा में जाना जरूरी है. अक्सर पौधे के निचले हिस्से में फालतू की टहनियां निकल आती हैं, जो सारा पोषण सोख लेती हैं. फल आने के दौरान सूखी, बीमार या घनी टहनियों को काट दें. इससे फल को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है. बेहतर वेंटिलेशन न केवल फलों का साइज बढ़ाता है बल्कि कीटों के हमले को भी कम करता है.

तेज धूप और गर्मी के दिनों में मिट्टी की नमी जल्दी सूख जाती है, जिससे फल सख्त हो जाते हैं. इसे रोकने के लिए पौधे के घेरे में सूखी घास, पुआल या पत्तों की एक परत बिछा दें, जिसे मल्चिंग कहते हैं. यह तकनीक जड़ों के तापमान को स्थिर रखती है और मिट्टी की नमी को लंबे समय तक बरकरार रखती है, जिससे फल अंत तक रसदार बने रहते हैं.

नींबू में ‘सिट्रस कैंकर’ या ‘लीफ माइनर’ जैसे रोग फलों की ग्रोथ को रोक देते हैं. अगर फलों पर काले धब्बे दिखें या पत्तियां मुड़ने लगें, तो नीम के तेल या फंगीसाइड का प्रयोग करें. स्वस्थ पौधा ही बड़े फल पैदा कर सकता है. समय-समय पर पौधों का निरीक्षण करें और सुनिश्चित करें कि कोई भी कीट फल के छिलके को नुकसान न पहुंचाए, वरना रस कम हो सकता है.