न्यूरो की बीमारी में कैसे फायदेमंद है पंचकर्म से इलाज, इन बीमारियों में भी लाभदायक
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वैद्य अभिषेक मिश्रा बताते हैं कि पंचकर्म सीधे शुरू नहीं किया जाता है. पहले शरीर को तैयार किया जाता है. इसमें तेल मालिश (अभ्यंग), भाप (स्वेदन) और हल्का भोजन दिया जाता है. जब शरीर अंदर से ढीला और तैयार हो जाता है, तब मुख्य प्रक्रिया की जाती है. पूरा उपचार कुछ दिनों से लेकर 15 से 20 दिनों तक चल सकता है. डॉ. अभिषेक मिश्रा बताते हैं कि पंचकर्म से जोड़ों का दर्द, त्वचा रोग, पेट की समस्या, माइग्रेन, एलर्जी, तनाव, साइटिका, सर्वाइकल और मोटापा जैसी समस्याओं में लाभ बताया जाता है.
गोंडा: अगर आप नसों (न्यूरो) से जुड़ी समस्याओं जैसे लकवा, नसों में कमजोरी, तनाव या सिरदर्द से परेशान हैं, तो आयुर्वेद की पंचकर्म थेरेपी एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रही है. गोंडा जिले के विकासखंड इटियाथोक के महादेवा कलां में भी अब पंचकर्म की सुविधा उपलब्ध है, जहां अभिषेक मिश्रा प्राकृतिक तरीके से इलाज करा रहे हैं. पंचकर्म आयुर्वेद की एक खास उपचार पद्धति है, जिसमें शरीर की सफाई (डिटॉक्स) की जाती है. इसमें वमन, विरेचन, बस्टी, नस्य और रकतमोक्षण जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं, जो शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में मदद करती हैं.
किन बीमारियों में पंचकर्म है फायदेमंद
लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य अभिषेक मिश्रा बताते हैं कि पंचकर्म सीधे शुरू नहीं किया जाता है. पहले शरीर को तैयार किया जाता है. इसमें तेल मालिश (अभ्यंग), भाप (स्वेदन) और हल्का भोजन दिया जाता है. जब शरीर अंदर से ढीला और तैयार हो जाता है, तब मुख्य प्रक्रिया की जाती है. पूरा उपचार कुछ दिनों से लेकर 15 से 20 दिनों तक चल सकता है. डॉ. अभिषेक मिश्रा बताते हैं कि पंचकर्म से जोड़ों का दर्द, त्वचा रोग, पेट की समस्या, माइग्रेन, एलर्जी, तनाव, साइटिका, सर्वाइकल और मोटापा जैसी समस्याओं में लाभ बताया जाता है. हालांकि हर व्यक्ति के लिए यह जरूरी नहीं है. गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग या गंभीर रोग से पीड़ित लोग बिना डॉक्टर की सलाह के यह उपचार न कराएं.
पंचकर्म कराने से पहले बरतें सावधानी
अभिषेक मिश्रा का कहना है कि पंचकर्म हमेशा अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक की देख-रेख में ही कराना चाहिए. सही तरीके से किया गया पंचकर्म शरीर को हल्का, ऊर्जावान और स्वस्थ महसूस करा सकता है. हमारे यहां नस से जुड़ी सारी समस्या का इलाज किया जाता है उसके अलावा पेट से जुड़ी समस्या, माइग्रेन और स्क्रीन से जुड़ी समस्या के मरीज आते हैं और उनका पंचकर्म किया जाता है. जिस मरीज को साइटिका और सर्वाइकल होता है उनके पंचकर्म करने के बाद वाइब्रेटर मशीन के द्वारा उनके शरीर पर चलाया जाता है लेकिन इसको सब लोग नहीं कर सकते हैं क्योंकि इसमें एक्सपीरियंस की जरूरत होती है इसलिए इसको जिसके पास एक्सपीरियंस है वही कर सकता है. ऐसा करने से मरीज के जो नस हट जाती हैं या उनमें स्वेलिंग आ जाती है तो वह सही हो जाता है. और ऐसा करने से मरीज को काफी रिलैक्स महसूस होता है.
मैरिज भगना देवी बताती है कि हमारे जोड़ों में काफी दर्द था. हमारे गांव की एक महिला ने हमको यहां के बारे में बताया और हम यहां पर आए तो हमको काफी फायदा हुआ है. उन्होंने बताया कि हम काफी जगह इलाज कर चुकी थी लेकिन हमको आराम नहीं मिल रहा था. उन्होंने बताया कि हमको यहां इलाज करते हुए अभी मात्र 4 दिन हुए हैं और चार दिन में हमको काफी आराम मिला है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें