पराली अब बन रही सोना, पंजाब के कारोबारी ने दिखाई नहीं राह, किसानों को मिल रहा राहत
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Lakhimpur Kheri: लखीमपुर खीरी जिले के निवासियों को अब पराली से छुटकारा मिल रहा है. पंजाब के कारोबारी यूपी के लखीमपुर जिले में आकर अपनी आधुनिक मशीनों की मदद से प्रणाली को एकत्र करके अपने प्रदेश ले जाकर वहां मुनाफा कमा रहे हैं.
लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में इस समय जहां एक और किस पराली के समस्या से बेहद परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर लखीमपुर खीरी की पराली प्रबंधन में पंजाब का अहम रोल देखने को मिल रहा है. पंजाब के कारोबारी यूपी के लखीमपुर जिले में आकर अपनी आधुनिक मशीनों की मदद से प्रणाली को एकत्र करके अपने प्रदेश ले जाकर वहां मुनाफा कमा रहे हैं. पंजाब की आधुनिक मशीनों से जिले के अलग-अलग हिस्सों में वह अपना काम कर रहे हैं. जब से पंजाब से कारोबारी आए हुए हैं, तब से जिले में पराली जलाने की घटनाएं भी कम हो रही हैं, जिससे किसानों को दिक्कतों का भी सामना करना नहीं पड़ता है.
जहां एक ओर इस समय गन्ने की छिलाई शुरू हो गई है तो वहीं दूसरी ओर बचे हुए अवशेष किसानों के लिए एक चुनौती बनते जा रहे थे. ऐसे में किसानों को काफी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ता था. पंजाब से आए कारोबारी पराली से कप, प्लेट, कटोरी, गिलास और बायोगैस बनाते हैं.
पराली प्रबंधन में अहम रोल
हर्षदीप सिंह ने बातचीत करते हुए बताया कि इस समय कृषि यंत्र में बेलर और रैंक मशीन के माध्यम से पराली प्रबंधन में अहम रोल अदा कर रही है, जिससे गन्ने की फसल की कटाई के बाद खेतों में फैली पराली यह पताई को रेट मशीन लाइनों में इकट्ठा करती है. उसके बाद बेलर मशीन गन्ने की पताई के बंडल तैयार करती है. बंडल को एकत्र होने के बाद ट्राला में उन्हें एक जगह से दूसरी लगा ले जाया जाता है. इस प्रक्रिया से खेत की अच्छी तरह सफाई हो जाती है. 1 एकड़ खेत की पराली को करीब 20 मिनट में बंडल बनाकर खेत को साफ कर देते हैं, जिससे किसानों को छुटकारा मिल रहा है.
बिना पैसा खर्च के ही ले जाते हैं पराली
इस विधि से किसानों का एक भी पैसा खर्च नहीं होता है और बिना पैसा खर्च के ही उनके खेत की पराली को हम लोग एकत्र करके अपने साथ में ले जाते हैं. उसके बाद उसे पंजाब कारोबार के लिए भेज दिया जाता है. ज्यादातर इसका इस्तेमाल सीबीजी ( कंप्रेस बायोगैस) प्लांट में होता है. कृषि उपनिदेशक लखीमपुर खीरी गिरीश चंद्र ने जानकारी देते हुए बताया किसानों को अनुदान पर बेलर और रैक मशीने कृषि विभाग की ओर से दी जा रही है, जिससे इच्छुक किसान खरीदारी कर सकते हैं.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.