पारंपरिक खेती से हटकर बोया लहसुन, जैविक खाद से बढ़ाई गुणवत्ता, अब अच्छी आमदनी की उम्मीद
Last Updated:
Lahsun ki kheti: अशोक कुमार मौर्य का कहना है कि इस बार लहसुन की फसल काफी अच्छी दिख रही है, इसलिए उन्हें ठीक-ठाक आमदनी की उम्मीद है. वे अपने गांव के अन्य किसानों को भी लहसुन की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहे है. कई किसान उनसे सलाह लेकर इस फसल को अपनाने लगे है. इससे न सिर्फ उनकी आय में बढ़ोतरी हो रही है, बल्कि गांव में रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे है.
Benefits of Garlic Cultivation: अगर खेती को सही प्लानिंग और प्रोसेस से किया जाए तो किसान मालामाल बन सकते है. भारत में खेती अब सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि ‘स्मार्ट बिजनेस’ बन चुकी है. अगर आप भी खेती से मोटा पैसा कमाना चाहते हैं तो फिर लहसुन आपके लिए किसी एटीएम से कम नहीं है. पिछले कुछ सालों में लहसुन के भाव ने आसमान छुआ है, उसने कई किसानों को रातों-रात लखपति बना दिया.
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के वजीरगंज विकासखंड के एक किसान ने पारंपरिक गेहूं-धान की खेती छोड़ लहसुन की खेती अपनाई और अब अच्छी आमदनी कर रहे है. जहां अधिकांश किसान अभी भी पारंपरिक फसलों पर निर्भर है. वहीं इस किसान की बदली हुई सोच अब दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन रही है.
लोकल 18 से बातचीत में प्रगतिशील किसान अशोक कुमार मौर्य बताते है कि पहले वे गेहूं और धान की खेती करते थे. लेकिन इसमें लागत ज्यादा और मुनाफा कम था. मौसम की मार और बाजार में उचित दाम न मिलने से अक्सर नुकसान उठाना पड़ता था. इसी बीच उन्होंने एक किसान को लहसुन की खेती करते देखा तो विचार आया कि वे भी इसे अपनाएं, क्योंकि लहसुन का भाव बाजार में अपेक्षाकृत स्थिर रहता है. शुरुआत में उन्होंने थोड़ी जमीन पर लहसुन बोया. जिससे अच्छी आमदनी हुई. वर्तमान में वे लगभग 5 बिस्वा जमीन में लहसुन की खेती कर रहे है.
बेहतर बीज और खेत की तैयारी
अशोक कुमार मौर्य बताते है कि लहसुन की खेती शुरू करने से पहले उन्होंने अच्छी क्वालिटी के बीज चुने और खेत की सही तरीके से तैयारी की. लहसुन के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी और ठंडा मौसम उपयुक्त माना जाता है. उन्होंने समय पर बुवाई की और सिंचाई व खाद पर विशेष ध्यान दिया. जिसका परिणाम यह रहा कि फसल अच्छी हुई और उत्पादन भी अधिक मिला.
कम लागत, ज्यादा मुनाफा
अशोक कुमार मौर्य के अनुसार लहसुन की खेती में लागत अपेक्षाकृत कम आती है, जबकि मुनाफा अच्छा हो जाता है. बाजार में लहसुन की मांग लगातार बनी रहती है. इसलिए फसल की बिक्री में उन्हें कोई दिक्कत नहीं आती.
जैविक खाद से बढ़ी फसल की गुणवत्ता
वे बताते हैं कि वे अपने लहसुन के खेत में ज्यादातर जैविक खाद का प्रयोग करते है और रासायनिक खाद बहुत कम या न के बराबर उपयोग करते है. इससे उनकी फसल की गुणवत्ता बेहतर रहती है और बाजार में अच्छी मांग बनी रहती है. उनका कहना है कि समय पर निराई-गुड़ाई और रोग-कीट प्रबंधन करना भी बेहद जरूरी है. यदि फसल की सही देखभाल की जाए तो उत्पादन और क्वालिटी दोनों बेहतर होते है. जैविक खाद के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है. जिसका सकारात्मक असर फसल पर दिखाई देता है.
ठीक-ठाक आमदनी की उम्मीद
अशोक कुमार मौर्य का कहना है कि इस बार लहसुन की फसल काफी अच्छी दिख रही है, इसलिए उन्हें ठीक-ठाक आमदनी की उम्मीद है. वे अपने गांव के अन्य किसानों को भी लहसुन की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहे है. कई किसान उनसे सलाह लेकर इस फसल को अपनाने लगे है. इससे न सिर्फ उनकी आय में बढ़ोतरी हो रही है, बल्कि गांव में रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे है.
About the Author
काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें