पीतल नगरी मुरादाबाद में बन रही राष्ट्रीय प्रतीक अशोक की लाट, गणतंत्र दिवस से पहले बढ़ी लाट की डिमांड
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Moradabad latest news : पीतल नगरी मुरादाबाद एक बार फिर अपनी कारीगरी को लेकर सुर्खियों में है. देवी देवताओं की मूर्तियों और सजावटी सामान के साथ अब यहां पीतल की अशोक की लाट तैयार की जा रही है. गणतंत्र दिवस के मौके पर इसकी डिमांड तेजी से बढ़ी है और यह देश विदेश तक एक्सपोर्ट हो रही है.
मुरादाबाद : यूपी का मुरादाबाद पूरी दुनिया में पीतल नगरी के नाम से जाना जाता है. यहां तैयार होने वाले पीतल के उत्पाद देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक निर्यात किए जाते हैं. देवी देवताओं की मूर्तियों और सजावटी वस्तुओं के साथ अब मुरादाबाद में अशोक की लाट भी तैयार की जा रही है. गणतंत्र दिवस के मौके पर इसकी मांग तेजी से बढ़ गई है और यह उत्पाद खास पहचान बना रहा है.
पीतल नगरी की वैश्विक पहचान
मुरादाबाद के पीतल उद्योग की पहचान दशकों पुरानी है. यहां के कारीगर पीतल से बारीक नकाशी और आकर्षक डिजाइन तैयार करने में माहिर हैं. पीतल से बनी मूर्तियां. सजावटी सामान. होम डेकोर आइटम और अब अशोक की लाट भी इस शहर की कला को दुनिया तक पहुंचा रही है. मुरादाबाद में तैयार होने वाली अशोक की लाट पर की गई नकाशी इसे और भी खास बनाती है.
मुरादाबाद में ही होती है पूरी प्रक्रिया
अशोक की लाट का निर्माण मुरादाबाद में ही किया जाता है. यहां कारीगर पीतल को ढालकर अलग-अलग साइज में अशोक की लाट तैयार करते हैं. इसके बाद उस पर बारीक नकाशी की जाती है. तैयार होने के बाद इन्हें देश और विदेश में एक्सपोर्ट किया जाता है. खासकर राष्ट्रीय पर्वों के दौरान इसकी मांग में तेजी देखने को मिलती है.
अलग-अलग साइज और डिजाइन में उपलब्ध
पीतल कारोबारी राघव खन्ना ने बताया कि देवी देवताओं की मूर्तियों के साथ-साथ अब अशोक की लाट भी बड़े पैमाने पर तैयार की जा रही है. यह एक नहीं बल्कि कई साइज में बनाई जाती है. मेज पर रखने के लिए छोटे साइज से लेकर दीवार पर लगाने वाले डिजाइन तक उपलब्ध हैं. अशोक की लाट का साइज 3 इंच से लेकर 15 इंच तक रहता है. ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार कस्टम ऑर्डर भी दे सकते हैं.
कीमत बजट के अनुसार तय
अशोक की लाट की कीमत साइज और डिजाइन के अनुसार तय की जाती है. राघव खन्ना ने बताया कि इसकी कीमत 400 रुपये प्रति पीस से शुरू होती है. इसके बाद कीमत ग्राहक के बजट और पसंद पर निर्भर करती है. खास डिजाइन और नकाशी वाली अशोक की लाट की कीमत अधिक हो सकती है. ग्राहक अपनी पसंद की लाट यहां तैयार करवा सकते हैं.
26 जनवरी को लेकर बढ़ी डिमांड
उन्होंने बताया कि गणतंत्र दिवस नजदीक आते ही अशोक की लाट की डिमांड अचानक बढ़ जाती है. 26 जनवरी के मौके पर सरकारी दफ्तरों में अफसरों को गिफ्ट के तौर पर अशोक की लाट दी जाती है. खासकर उत्तर प्रदेश और दिल्ली में इसकी सबसे ज्यादा मांग रहती है. राष्ट्रीय प्रतीक होने के कारण यह लोगों की पहली पसंद बनती जा रही है.
सरकारी दफ्तरों में होता है अधिक उपयोग
अशोक की लाट को मुख्य रूप से सरकारी दफ्तरों. सरकारी आवासों और कार्यालयों में सजावट के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह न केवल राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है. बल्कि पीतल की खूबसूरती और मुरादाबाद की कारीगरी को भी दर्शाती है. इसी वजह से यह उत्पाद तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.