फर्रुखाबाद के रजत राठौर की सफलता, नौकरी छोड़ी, नूडल्स बिजनेस शुरू किया और अब कमा रहे अच्छा मुनाफा

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फर्रुखाबाद के रजत राठौर की सफलता, नौकरी छोड़ी, नूडल्स बिजनेस शुरू किया और अब कमा रहे अच्छा मुनाफा


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Farrukhabad News: फर्रुखाबाद जिले के रजत नूडल्स को इतनी मात्रा में बनाते है कि यह एक से दो दिनों में खत्म हो जाते है. नूडल्स को ज्यादा दिनों तक रखने से इनका स्वाद बदल जाता है और ग्राहक पसंद नहीं करते है, इसलिए जितनी खपत होती है, उतना ही बनाते है. इसके बाद फिर बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. अगर आप भी रजत के नूडल्स का स्वाद लेना चाहते है तो आपको जिले के फतेहगढ़ जाना पड़ेगा. वहां पर आपको ये नूडल्स बड़े आराम से मिल जाएंगे.

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में एक व्यक्ति रोजगार को लेकर काफी चिंतित रहता था. उसे हमेशा चिंता सताती रहती थी कि ऐसा क्या किया जाए जिससे अच्छा मुनाफा हो सके. अंततः उन्होंने नूडल्स का व्यापार शुरू करने का निर्णय लिया और आज वह अच्छी खासी कमाई कर रहे है. हम बात कर रहे है फर्रुखाबाद जिले के फतेहगढ़ मुख्य मार्ग की. आइए जानते है कि नूडल्स का व्यापार करने का विचार कैसे आया और नूडल्स कैसे तैयार किए जाते है व क्या है उनकी खास रेसिपी.

लोकल-18 को रजत राठौर ने बताया कि वह पहले प्राइवेट नौकरी करते थे. लेकिन प्राइवेट नौकरी से मिलने वाली सैलरी घर की जरूरतों में खर्च हो जाती थी. तब उनके बेटे ने सोचा कि क्यों न कोई ऐसा बिजनेस किया जाए. जिससे अधिक कमाई हो सके और घर खर्च के बाद कुछ पैसे बच भी सकें. तब उन्होंने अपना खुद का नूडल्स बनाने का बिजनेस शुरू कर दिया. अब रजत खुद नूडल्स बनाकर सप्लाई करते है और तैयार नूडल्स की प्लेट 30 रुपए में बेचते है.

साल दर साल रहती है मांग
यूपी में नूडल्स के कई चाहने वाले है. हर गली नुक्कड़ पर नूडल्स बनते हुए नजर आते है. लोग सुबह-शाम बड़े चाव से नूडल्स खाते है. यहां तक कि बड़े-बड़े रेस्टोरेंट में भी इनकी अच्छी कीमत मिलती है. शायद यही वजह है कि नूडल्स बनाने का काम साल दर साल चलता रहता है.

नूडल्स बनाने की रेसिपी
रजत ने बताया कि नूडल्स बनाने के लिए पानी और मैदे का इस्तेमाल किया जाता है. इसको बनाने की प्रक्रिया बहुत जटिल नहीं है और इसे आराम से बनाया जा सकता है। नूडल्स बनाने के लिए सबसे पहले आटा गूंथना होता है. मैदे, पानी और नमक को मिक्सर में डालकर अच्छी तरह गूंथा जाता है. फिर गूंथे हुए आटे को कई रोलर्स से गुजारकर पतली शीट में बदल दिया जाता है और आकार देकर काट लिया जाता है. काटने के बाद शीट को डाई से गुजारकर नूडल्स का आकार दिया जाता है और फिर कटर से अलग-अलग लंबाई में काटा जाता है. इसके बाद नूडल्स को हीटिंग चेंबर में सुखाया जाता है या स्टीमर में हल्का पकाया जाता है. इसके बाद ठंडा कर पैक कर लिया जाता है और यह बिक्री के लिए तैयार हो जाता है.

जितनी खपत उतना माल फिर तैयार
फर्रुखाबाद जिले के रजत नूडल्स को इतनी मात्रा में बनाते है कि यह एक से दो दिनों में खत्म हो जाते है. नूडल्स को ज्यादा दिनों तक रखने से इनका स्वाद बदल जाता है और ग्राहक पसंद नहीं करते है, इसलिए जितनी खपत होती है, उतना ही बनाते है. इसके बाद फिर बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. अगर आप भी रजत के नूडल्स का स्वाद लेना चाहते है तो आपको जिले के फतेहगढ़ जाना पड़ेगा. वहां पर आपको ये नूडल्स बड़े आराम से मिल जाएंगे.

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