फिरोजाबाद की सदियों पुरानी दरगाह, यहां मन्नत पूरी होने पर भरी जाती है ओखली, दिल्ली-मुंबई से आते हैं श्रद्धालु
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Firozabad News: शिकोहाबाद बटेश्वर मार्ग स्थित रपड़ी गांव में बनी दरगाह के खादिम अफजल शाह ने लोकल 18 से बातचीत की और बताया कि यह मकबरा शेख फरीदुद्दीन उर्फ फिद्दू मियां बाबा का है. बाबा को कुछ दैविक और आध्यात्मिक शक्तियां प्राप्त थी. सन् 1312 ई में बाबा ने इस जगह को अपना आशियाना बनाया था. वही उन्होंने बताया कि बाबा के काफी चमत्कार हुए हैं.
Dargah in Firozabad: यूपी के फिरोजाबाद में एक ऐसी दरगाह है. जिसके चमत्कार दूर दूर तक प्रसिद्ध है. फिरोजाबाद के बटेश्वर मार्ग पर स्थित रपड़ी गांव में हजारों साल पुरानी दरगाह बनी हुई है, जहां सूफी संत ने कई तरह के चमत्कार किए. वहीं इसके बारे में आज भी लोग तरह-तरह की कहानियां भी सुनाते हैं. यहां पर एक बड़ा उर्स का मेला भी लगता है और मन्नत पूरी होने पर लोग चादर भी चढ़ाने आते हैं. ये एक पर्यटक स्थल भी है जहां लोग घूमने के लिए भी आते हैं.वही यहां मन्नत पूरी होने पर ओखली भरने की एक विशेष परम्परा है.
शिकोहाबाद बटेश्वर मार्ग स्थित रपड़ी गांव में बनी दरगाह के खादिम अफजल शाह ने लोकल 18 से बातचीत की और बताया कि यह मकबरा शेख फरीदुद्दीन उर्फ फिद्दू मियां बाबा का है. बाबा को कुछ दैविक और आध्यात्मिक शक्तियां प्राप्त थी. सन् 1312 ई में बाबा ने इस जगह को अपना आशियाना बनाया था. वही उन्होंने बताया कि बाबा के काफी चमत्कार हुए हैं. सच्चे मन से जो भी लोग यहां आकर माथा टेकते हैं उनकी सभी मुराद पूरी होती है.
लोग मन्नत पूरी होने पर यहां चादर चढ़ाने आते हैं. इसके अलावा यहां की एक विशेष परम्परा यह भी है कि लोग यहां की ओखली को आटे और लाई से भरते है. खादिम ने बताया कि जिनकी मुराद पूरी हो जाती है वो यहां आकर ओखली में पांच किलो आटा और लाई भरते है. बाबा की इस दरगाह पर पुरातत्व विभाग आगरा द्वारा बोर्ड भी लगाया गया है. इस मकबरे की देखभाल कई सालों से पुरातत्व विभाग कर रहा है.
सभी धर्मों के लोग आकर चढ़ाते हैं चादर
सिरसागंज से आए खलील एहमद ने बताया कि यहां मई में एक बड़ा उर्स का मेला भी लगता है. यहां शादी होने के बाद सेहरा चढ़ाने की परम्परा है. बाबा की कृपा से उनके बेटे की शादी हो गई और अब वो यहां सेहरा चढ़ाने आए है. वही ओखली भरने आई फरजाना ने कहा कि उनके यहां तो काफी सालों से बाबा के चमत्कार होते चले आ रहे हैं. अभी उनकी बेटी की तबियत बेहद खराब हो गई थी. डॉक्टर ने भी हार मान ली थी. फिर उन्होंने बाबा से घर बैठे ही मन्नत मांगी और बेटी बिल्कुल ठीक हो गई. इसलिए अब वह यहां ओखली भरने के लिए आई हैं.इस दरगाह पर हिंदू मुस्लिम सभी धर्मों के लोग चादर चढ़ाने के लिए आते है.