फिरोजाबाद के युवा ने बनाया अनोखा ड्रोन, ऊंची-नीची जमीन पर भी आसानी से होगी लैंडिंग; 70 हजार आया खर्च
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Firozabad News: फिरोजाबाद के रहने वाले युवा प्रवेंद्र कुमार ने लोकल 18 से बातचीत की और बताया कि उन्होंने 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद आईआईटी रुड़की में एडमिशन लिया था. लेकिन अचानक बीमार होने के कारण उनका यह सपना अधूरा रह गया. उसके बाद वह लगातार अपने टैलेंट को निखारने में लगे रहे. इसी के चलते उन्होंने एक ऐसा प्रोजेक्ट तैयार किया है जो अभी तक भारत में नहीं है.
फिरोजाबाद में रहने वाले एक युवा ने अपने टैलेंट से नया आविष्कार किया है. ड्रोन हेलीकॉप्टर को प्लेन सर्फेस पर लैंडिंग कराने के लिए एक प्रोजेक्ट डिजाइन किया है. जिसकी मदद से ऊंची नीची जगह पर आसानी से लैंडिंग कराई जा सकती है. युवा के इस प्रोजेक्ट को एक कंपनी ने भी स्वीकृति दी है. इस प्रोजेक्ट का इस्तेमाल कर सेना के हैलीकॉप्टर को आसानी से लैंडिंग कराई जा सकती है.
फिरोजाबाद के रहने वाले युवा प्रवेंद्र कुमार ने लोकल 18 से बातचीत की और बताया कि उन्होंने 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद आईआईटी रुड़की में एडमिशन लिया था. लेकिन अचानक बीमार होने के कारण उनका यह सपना अधूरा रह गया. उसके बाद वह लगातार अपने टैलेंट को निखारने में लगे रहे. इसी के चलते उन्होंने एक ऐसा प्रोजेक्ट तैयार किया है जो अभी तक भारत में नहीं है.
इस प्रोजेक्ट की मदद से किसी भी ड्रोन हेलीकॉप्टर और वजनदार चीज को ऊंची नीची जगह पर आसानी से लैंड करा सकते हैं. इसमें ऑटोमैटिक एडजस्टेबल सेंसर लगाए गए हैं तो ऊपर से नीचे आते वक्त जगह का माप लेते हैं और उसमें से फोर साइड स्टैंड निकलकर खुद को तैयार करते है. जिससे लैंडिंग वाली जगह ऊंची नीची है तो उसी साइज में एडजस्ट कर लेते है और भारी से भारी वस्तु आसानी से लैंडिंग कर सकती है. वही उन्होंने बताया कि इसका इस्तेमाल हम युद्ध के दौरान अपनी सेना के लिए कर सकते है या फिर पहाड़ों पर लैंडिंग के लिए हम इसका इस्तेमाल कर सकते है.
70 हजार रुपए आया है खर्च
युवा ने बताया कि यह एक एडजेस्टेबल लैंडिंग सिस्टम है जिसकी मदद से ऊंची नीची जगह पर ड्रोन हेलीकॉप्टर लैंड करा सकते है. इस प्रोजेक्ट को बनाने का आइडिया अमेरिका से आया. साल 2015 में अमेरिका की एक कंपनी डीएआरपी ने अपना एक प्रोजेक्ट बनाया था. जिसमें ड्रोन को आसानी से ऊंची नीची जगह पर लैंड कराया जा सकता था. उसी को देखते हुए उन्होंने ये सिस्टम बनाया है. इसे तैयार करने में लगभग 9 महीने लगे है और इसमें 70 हजार रुपए का खर्चा आया है. वही इस प्रोजेक्ट का एक्सपेरिमेंट भी किया गया है. एक हजार लीटर पानी की टंकी को एक टन वजन के साथ क्रेन की मदद से लैंड कराया गया है. इंडिया की एचएएल कंपनी ने इसे ड्रोन और कम वजह वाले हैलीकॉप्टर के इस्तेमाल के लिए बेस्ट बताया है. युवा का कहना है कि सेना में युद्ध के दौरान सामान पहुंचाने में यह मदद कर सकता है.