बजट 2 से हो गया 42 करोड़, फिर भी अधूरा रह गया है मेट्रो स्टेशन को जोड़ने वाला स्काईवाक, भ्रष्टाचार या और कोई वजह

0
बजट 2 से हो गया 42 करोड़, फिर भी अधूरा रह गया है मेट्रो स्टेशन को जोड़ने वाला स्काईवाक, भ्रष्टाचार या और कोई वजह


Last Updated:

नोएडा: नोएडा प्राधिकरण का प्रोजेक्ट सेक्टर-52 (ब्लू लाइन) और सेक्टर-51 (एक्वा लाइन) मेट्रो स्टेशनों को जोड़ने वाला स्काईवॉक, अब जनता के पैसों के दुरुपयोग का जीता-जागता प्रतीक बन गया है. जून 2023 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट महज पांच महीनों में पूरा होना था, लेकिन 2026 आ गया और ढांचा अब भी अधूरा खड़ा है. 42 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो.

ख़बरें फटाफट

नोएडा: नोएडा प्राधिकरण का प्रोजेक्ट सेक्टर-52 (ब्लू लाइन) और सेक्टर-51 (एक्वा लाइन) मेट्रो स्टेशनों को जोड़ने वाला स्काईवॉक, अब जनता के पैसों के दुरुपयोग का जीता-जागता प्रतीक बन गया है. जून 2023 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट महज पांच महीनों में पूरा होना था, लेकिन 2026 आ गया. ढांचा अब भी अधूरा खड़ा है. 42 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह अस्थायी स्काईवॉक उस समय तक शायद पूरी तरह उपयोग में भी न आ पाए. जब तक इसे 2029 में एग्रीमेंट के तहत तोड़ने की घड़ी न आ जाए. यात्रियों को राहत देने के बजाय यह प्रोजेक्ट सवालों और फाइलों में उलझती चली जा रही है.

2029 में हटाने की शर्त पहले से है तय

आपको बता दें कि इस स्काईवॉक से पहले प्राधिकरण ने अस्थायी सुविधा के नाम पर 2 करोड़ रुपये खर्च कर एक वॉकवे भी बनवाया था, जिसे बाद में इसी स्काईवॉक के निर्माणाधीन के तले दाब दिया. यानी सुविधा आई नहीं, लेकिन खर्चा दो बार हो गया. दोनों मेट्रो स्टेशनों के बीच पीछे के साइट बन रहे मॉल के कारण 2029 तक स्काईवॉक हटाने की शर्त पहले से तय है. मॉल बनने के बाद एस्केलेटर से दोनों स्टेशनों को जोड़ने की योजना है, जिससे दूरी 400 मीटर से घटकर 200 मीटर रह जाएगी और स्काईवॉक बेकार हो जाएगा.

पांच महीनों की जगह तीन साल में भी नहीं मिली सुविधा

तकनीकी गड़बड़ियों ने परियोजना को और उलझा दिया है. जहां स्काईवॉक को सेक्टर-51 स्टेशन से जोड़ना था, वहां दीवार और बीच में फंसी बीम सबसे बड़ा रोड़ा बन गई है. दीवार तोड़ने पर बीम बीच में आ गया और बीम हटाने पर मेट्रो स्टेशन का स्ट्रक्चर की मजबूती पर सवाल खड़े हो गए है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आईआईटी से परीक्षण कराने के बावजूद इंजीनियरों को ये बाधाएं निर्माण से पहले क्यों नहीं दिखीं. आज स्थिति यह है कि सेक्टर-52 से आने वाले यात्रियों को सेक्टर-51 पर उतारने की व्यवस्था ही नहीं बन पाई. यानी करोड़ों खर्च होने के बाद भी सुविधा शून्य है. और हर रोज हजारों सवारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

जांच के बाद कार्यवाही की बात

अब प्राधिकरण के सीईओ ने 10 मार्च तक उद्घाटन कराने का निर्देश दिया है, जबकि काम अधूरा और समस्याएं जस की तस हैं. अधिकारियों का कहना है कि जांच चल रही है और दोषियों पर कार्रवाई होगी, लेकिन जब 42 करोड़ खर्च हो चुके, सुविधा कब मिलेगी ये कोई नहीं जानता. सेक्टर-51 और 52 के बीच खड़ा यह अधूरा स्काईवॉक फिलहाल यात्रियों के लिए रास्ता नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यशैली पर खड़ा बड़ा सवाल बन गया है.

About the Author

Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हो सकता है आप चूक गए हों