बड़ा मशहूर है आगरा का पागलखाना, कब और कैसे हुई थी इसकी स्थापना? बेहद रोचक है कहानी
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Agra News: आगरा के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान की स्थापना 1859 में क्वीन विक्टोरिया के आदेश पर हुई थी. अब यहां आधुनिक इलाज उपलब्ध है और मरीज स्वस्थ होकर घर जाते हैं.
आगरा : उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय का इतिहास बेहद रोचक है. ब्रिटिशकाल में इस अस्पताल की नींव रखी गयी थी. 1857 की क्रांति के दौरान लेफ्टिनेंट गवर्नर जेआर केल्विन तनाव में आ गए थे. क्रांति की इस आंधी में यह अंग्रेज अफसर अपना मानसिक संतुलन खो बैठे थे. अंग्रेज अफसर केल्विन की हालत और क्रांति की लहर को देखते हुए अन्य अधिकारी और सैनिक भी अपना मानसिक आपा खोने लगे थे. अंग्रेज अफसर और कर्मचारियों की हालत को देख कर अन्य वरिष्ठ अधिकारियो को चिंता सताने लगी थी. साल 1859 में इंग्लैंड की महारानी क्वीन विक्टोरिया के आदेश के बाद आगरा में इस मेंटल हॉस्पिटल की शुरुआत हुई. उस दौरान यहां मानसिक रोगियों को जेल की तरह कैद खाने में रखा जाता था. उस दौर में मानसिक उपचार का कोई साधन भी नहीं हुआ करता था. अत्यधिक मानसिक पीड़ित लोगों को जंजीर या कैदखाने के अंदर बंद करके रखा जाता था, जिससे वह अन्य लोगों को नुकसान ना पंहुचा सके. ब्रिटिशकाल में यह एक जेल की तरह मानी जाती थी. समय के बदलाव को देखते हुए अब यहां मानसिक रोगियों का उपचार किया जाता है, जेल या कैद खाने की बातें अब किस्से और किताबों तक ही सिमट कर रह गई हैं.
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के निदेशक प्रो. डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि 1859 से 1950 तक मानसिक रोगियों का ईलाज उपलब्ध नहीं था. उस दौर में उस बीमारी को अभिशाप के रूप में माना जाता था. उन्होंने बताया कि उस दौरान यहां ऐसे मरीजों को शरण देने या उन्हें बंद करके रखा जाता था. डॉ. राठौर ने बताया कि उस समय मानसिक रोगियों के लिए कोई उपचार उपलब्ध नहीं था. मानसिक अस्पताल में उस समय रोगियों को बंदी की तरह एक स्थान पर रखा जाता था, जिससे वह किसी दूसरे व्यक्तियों को चोट न पहुंचाए. उस दौरान व्यक्ति मानसिक अस्पताल में आने से डरता था, लेकिन धीरे धीरे समय के बदलाव को देखते हुए अब यहां इलाज उपलब्ध है. पूर्व की तरह वर्तमान में अब रोगियों को बंदी नहीं बनाया जाता है, बल्कि उनका इलाज किया जाता है. मरीज को ठीक होने के बाद उन्हें उनके परिवार के साथ घर रवाना भी किया जाता है.
1950 के बाद मानसिक रोग की दवा उपलब्ध होना शुरू हुई थी
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के डायरेक्ट प्रो. डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि सन 1950 के बाद मानसिक रोगियों के लिए दवा आदि की शुरुआत हुई थी. 1950 के बाद दवा और अन्य उपायों से मरीज ठीक होने लगे और ठीक होकर घर जाने लगे. उसी दौरान मानसिक रोग को बीमारी माना जाने लगा. डॉ. राठौर ने बताया उसके बाद धीरे धीरे मानसिक चिकित्सालय में विकास का पहिया दौड़ने लगा. धीरे धीरे मानसिक रोगों पर कई शोध किये जाने लगे और उनकी दवा आदि उपचार मरीजों के लिए उयलब्ध होने लगा. डॉ. ने बताया कि 1986 के दौरान कुछ समय के लिए यहाँ विकास धीमा हो गया था. वर्तमान में मानसिक चिकित्सालय विकास की ओर बढ़ चढ़ा है. अब यहाँ रोगियों को अत्याधुनिक मशीनों, काउंसलिंग ओर दवाओं से ठीक कर घर भेजा जा रहा है…
पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में नई दुनिया अखबार से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों …और पढ़ें
पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में नई दुनिया अखबार से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों … और पढ़ें