बढ़ती ठंड में किसान इन बातों का रखें ध्यान, नहीं होगा फसल को नुकसान, जानें एक्सपर्ट की सलाह

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बढ़ती ठंड में किसान इन बातों का रखें ध्यान, नहीं होगा फसल को नुकसान, जानें एक्सपर्ट की सलाह


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Farming Tips: शीतलहर से ठंड बढ़ी है, लेकिन कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं और अन्य फसलों को घबराने की जरूरत नहीं. हल्की सिंचाई, सही उर्वरक और समय पर दवा छिड़काव से फसल सुरक्षित रह सकती है. संतुलित खेती ही इस मौसम में सफलता की कुंजी है.

गोरखपुर:  शहर में शीतलहर का असर साफ़ दिखाई दे रहा है. सुबह-शाम ठंड बढ़ गई है, कोहरा भी खेतों तक पहुंच चुका है. ऐसे में किसानों के मन में फसल को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है. लेकिन कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा मौसम घबराने का नहीं, बल्कि समझदारी से काम लेने का है. गोरखपुर के कृषि विशेषज्ञ एसपी सिंह बताते हैं कि अभी की शीतलहर गेहूं की फसल के लिए नुकसानदेह नहीं है. हां 21 से 25 दिन की अवस्था वाली फसल में हल्की सिंचाई बेहद जरूरी है. उन्होंने साफ कहा कि पानी ज्यादा भरने की गलती न करें, वरना फसल पीली पड़ सकती है और पैदावार पर असर पड़ सकता है. ठंड के इस दौर में संतुलन ही सबसे बड़ा मंत्र है.

यह समय खेत में उग आई खरपतवार को खत्म करने के लिए सबसे मुफीद है. किसान सही मात्रा में क्लोडिनोफॉप और कार्बेटाजोन जैसी दवाओं का छिड़काव कर सकते हैं. इससे आगे चलकर फसल को पोषण मिलने में कोई रुकावट नहीं आएगी. बेहतर बढ़वार के लिए विशेषज्ञ प्रति एकड़ 30 से 40 किलो यूरिया के प्रयोग की सलाह देते हैं. इसके अलावा नैनो यूरिया का घोल बनाकर स्प्रे करना भी कारगर साबित हो सकता है. यह तरीका आज के समय में ज्यादा प्रभावी और किफायती माना जा रहा है.

सब्जी की खेती करने का सही तरीका

सब्जी उगाने वाले किसानों के लिए भी यह मौसम चुनौती भरा है. आलू, टमाटर, प्याज और लहसुन की फसल में झुलसा रोग का खतरा बढ़ जाता है. इससे बचाव के लिए कार्बेंडाजिम और मैंकोजेब के घोल का छिड़काव जरूरी है. अगर आलू की पत्तियां मुड़ने लगें तो तुरंत घुलनशील उर्वरक 0:0:50 का इस्तेमाल करना चाहिए. सरसों और लाही की फसल इस समय फूल और फलियों की अवस्था में है. ठंड से बचाने के लिए हल्की सिंचाई करते रहना जरूरी है, ताकि खेत का तापमान संतुलित बना रहे और फसल को नुकसान न हो.

आम के बागानों को लेकर भी खास सलाह दी गई है. पुराने और बड़े आम के पेड़ों में फिलहाल सिंचाई की जरूरत नहीं है. लेकिन नए लगाए गए पौधों में जरूरत के अनुसार पानी देना चाहिए. इसके साथ ही सल्फर पाउडर के घोल का छिड़काव करने से बौर अच्छी आने की संभावना बढ़ जाती है. थोड़ी सतर्कता और सही तकनीक अपनाकर किसान इस मौसम में भी अपनी फसलों को सुरक्षित रख सकते हैं. आम की बागनी करने वाले विनय पांडे बताते हैं कि, सही तरीके से खेती करना बेहद जरूरी है नहीं तो फसल को नुकसान पहुंच सकता है.

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Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें

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