बदलते मौसम में अपने पशुओं का कैसे रखें ध्यान, जानिए एक्सपर्ट की राय

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बदलते मौसम में अपने पशुओं का कैसे रखें ध्यान, जानिए एक्सपर्ट की राय


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खाने-पीने का भी खास ध्यान रखें. मौसम बदलने पर पशुओं की डाइट में पौष्टिक चारा, हरा चारा और साफ पानी शामिल करें. गंदा या सड़ा हुआ चारा देने से पशु बीमार हो सकते हैं. पशुओं को बांधने वाले स्थान पर धूप की सीधा किरण ना पड़े उसके लिए या तो चद्दर की व्यवस्था या तो किसी छायेदार वृक्ष के नीचे पशुओं को बांधना चाहिए ऐसा करने से उन पर सीधा की किरण नहीं पड़ेगी.

गोंडा: जैसे-जैसे मौसम करवट लेता है, वैसे-वैसे इसका असर सिर्फ लोगों की सेहत पर नहीं बल्कि पशुओं पर भी दिखाई देने लगता है. बरसात से लेकर ठंड और गर्मी के बीच के इस बदलाव के दौरान गाय, भैंस, बकरी जैसे पशु कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं. यही वजह है कि इस समय पशुपालकों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है.

बकरी

लोकल 18 से बातचीत में पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार तिवारी बताते हैं कि मौसम में बदलाव के दौरान गलघोटू (Hemorrhagic Septicemia), खुरपका-मुंहपका (FMD), निमोनिया, और परजीवी रोग (Ticks & Worms) जैसी बीमारियों का खतरा सबसे अधिक रहता है. अगर समय पर सावधानी और टीकाकरण न किया जाए तो ये बीमारियां पूरे पशु समूह में फैल सकती हैं और भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं.

गाय

गौशाला में सफाई और सूखापन सबसे जरूरी: डॉ. राकेश तिवारी के अनुसार, बदलते मौसम में पशुओं को सर्दी और नमी से बचाना सबसे जरूरी है. गौशाला को हमेशा साफ-सुथरा और सूखा रखना चाहिए.

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गाय

इन रोगों से करें बचाव: डॉ. राकेश तिवारी बताते हैं कि खुरपका-मुंहपका (FMD) एक गंभीर संक्रामक रोग है. इससे पशुओं के मुंह, खुर और जीभ पर फफोले बन जाते हैं. इसके कारण पशु खाना-पीना छोड़ देते हैं और दूध उत्पादन में भारी गिरावट आती है. इससे बचाव का सबसे असरदार तरीका है नियमित टीकाकरण.

भैंस

हर तीन महीने में दें कृमिनाशक दवा: डॉ. राकेश तिवारी कहते हैं कि मौसम बदलते समय परजीवी जैसे कीड़े भी पशुओं में बीमारी फैलाते हैं. इससे बचने के लिए हर तीन महीने में कृमिनाशक दवा देना जरूरी है. साथ ही पशु की त्वचा और बालों को साफ रखना चाहिए ताकि परजीवी न पनपे.

भैंस

डॉ.राकेश तिवारी सलाह देते हैं कि पशुपालक हमेशा अपने नजदीकी पशु चिकित्सक के संपर्क में रहें. मौसम के अनुसार टीकाकरण का पूरा शेड्यूल फॉलो करें. साथ ही पशुओं को संतुलित आहार और साफ पानी दें. अगर ये सावधानियां अपनाई जाएं तो पशु बीमारियों से बचे रहेंगे और दूध उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ेगा.



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