बाराबंकी के किसान ने सहफसली खेती से 2 बीघा में कमा लिए 90 हजार तक मुनाफा!
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बाराबंकी के किसान कुलदीप सिंह सहफसली खेती अपनाकर कम लागत में अधिक मुनाफा कमा रहे हैं. 2 बीघा में ककड़ी और लोबिया की खेती से वे एक फसल में 80–90 हजार रुपये तक कमा लेते हैं, जबकि लागत मात्र 15–20 हजार रुपये प्रति बीघा आती है.
बाराबंकी. आज के समय में किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर सह-फसली खेती को तेजी से अपना रहे हैं. इस पद्धति में एक ही खेत में दो या उससे अधिक फसलें उगाई जाती हैं, जिससे कम लागत में ज्यादा उत्पादन और बेहतर मुनाफा मिलता है. खासतौर पर सब्जियों की खेती किसानों के लिए काफी लाभदायक साबित हो रही है, क्योंकि बाजार में हरी सब्जियों की मांग पूरे साल बनी रहती है. इससे किसानों को नियमित आय का अवसर मिलता है और एक ही फसल से अच्छी कमाई संभव हो पाती है. जिस कारण कई किसान सीजन के तौर पर होने वाली फसलों में ककड़ी लोबिया करेला आदि की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. जिले के इस किसान ने सहफसली की खेती कर उन्हें लागत के हिसाब से अच्छा मुनाफा हो रहा है जिसके लिए वह कई सालो से सहफ़सली की खेती कर रहे हैं. बाराबंकी जिले के बड़ेल गांव के रहने वाले किसान कुलदीप सिंह अन्य फसलों के मुकाबले साग सब्जियों की खेती की शुरुआत की, जिसमें उन्हें अच्छा मुनाफा देखने को मिला. आज वह करीब 2 बीघा में ककड़ी और लोबिया की खेती कर एक फसल पर 80 से 90 हजार रुपए मुनाफा कमा रहे है.
एक बीघे में 15 से 20 हजार रुपये आती है लागत
किसान कुलदीप सिंह ने बताया सीजनल सब्जियों की खेती वैसे तो हम चार-पांच सालों से कर रहे हैं, जिसमें ककड़ी, लोबिया, करेला, लौकी आदि फसले हैं. यह सब एक ही खेत में उगाते हैं जिसे सहफसली खेती कहते हैं, इसमें हम ना तो कोई खाद ना तो कीटनाशक व रसायन का छिड़काव नहीं करते हैं, जिससे हमारी सब्जियां शुद्ध वह केमिकल मुक्त रहती हैं और खाने में भी स्वादिष्ट होती है. इस समय हमारे पास करीब दो बीघे में ककड़ी, लोबिया लगी है, जिसमें लागत क़ी बात करे तो एक बीघे में 15 से 20 हजार रुपये आती है. वही मुनाफा करीब एक फसल पर 80 से 90 हज़ार रुपये तक हो जाता है, क्योंकि गर्मियों में ककड़ी व लोबिया की मांग बाजार में अधिक रहती है. इसकी खेती करना बहुत ही आसान है पहले खेत की जुताई की जाती है उसके बाद खेत समतल करके जैविक व जीवा अमृत का छिड़काव किया जाता है, उसके बाद खेत में मेड बनाकर ककड़ी और लोबिया के बीजों की बुवाई की जाती है, जब इसका पौधा निकलने क़े 20 से 22 दिन बाद इसकी सिंचाई की जाती है. वहीं इसकी बुवाई करने के महज 50 से 55 दिनों में फसल निकलने लगती है जिसे तोड़कर हम बाजारों में बिक्री कर सकते हैं.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें