बार-बार हो रही है कम पैदावार तो अपनाएं ये वैज्ञानिक उपाय..यकीन मानें लहलहा उठेगी फसल

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बार-बार हो रही है कम पैदावार तो अपनाएं ये वैज्ञानिक उपाय..यकीन मानें लहलहा उठेगी फसल


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Aligarh latest News: कृषि विशेषज्ञ श्रवण कुमार ने बताया कि पराली प्रबंधन, उन्नत बीजों का चयन, लाइन सोइंग, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के फोलियर स्प्रे से उत्पादन में 20-25% तक बढ़ोतरी संभव है.

अलीगढ़: रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों ने गेहूं, सरसों और आलू जैसी फसलों की बुवाई की तैयारियां शुरू कर दी हैं. इस दौरान सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि कम लागत में ज्यादा पैदावार कैसे ली जाए. किसानों की इस समस्या को दूर करने के लिए आइये जानते हैं कृषि विशेषज्ञ व अलीगढ़ मंडल संयुक्त कृषि निदेशक श्रवण कुमार से उपाय.

क्या है उपाय

जानकारी देते हुए कृषि विशेषज्ञ व अलीगढ़ मंडल संयुक्त कृषि निदेशक श्रवण कुमार ने बताया कि पश्चिम उत्तर प्रदेश एक उपजाऊ इलाका है, जहां गेहूं, सरसों और आलू की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. धान की कटाई के बाद खेत अगली फसलों के लिए तैयार किए जा रहे हैं. इस समय किसानों के लिए जरूरी है कि वे पराली का सही प्रबंधन करें. धान की फसल के अवशेष को मिट्टी पलटने वाले हल या कल्टीवेटर से खेत में दबा दें और यूरिया या डीकंपोजर का छिड़काव करें. इससे पराली सड़कर मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ाती है, जो जमीन की उर्वरता का हार्ट माना जाता है.

बुवाई और उन्नत बीजों का चयन बहुत अहम

उन्होंने कहा कि खेती में समय पर बुवाई और उन्नत बीजों का चयन बहुत अहम है. गेहूं की आधुनिक वैरायटी जैसे DBW 303, DBW 327, DBW 370, DBW 371 और HD 249 बेहतर उत्पादन देती हैं. किसान भाइयों को छिटकवा की जगह सीड ड्रिल से लाइन सोइंग करनी चाहिए. जिससे 10 से 12% अधिक पैदावार मिलती है. लाइन सोइंग से सिंचाई, निराई और कटाई आसान होती है. पौधों की जड़ें मजबूत बनती हैं और खाद का बेहतर उपयोग होता है.

वैज्ञानिक तरीके अपनाने से उत्पादन में 20 से 25% तक बढ़ोतरी संभव

उन्होंने बताया कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के फोलियर स्प्रे से पौधों की वृद्धि बढ़ती है और पर्यावरण प्रदूषण कम होता है. सरसों की खेती में पूसा मस्टर्ड 32, 33, 34 और आरएस 749 जैसी वैरायटीज उपयुक्त हैं. साथ ही एनपीएस या सिंगल सुपर फास्फेट के रूप में सल्फर का प्रयोग तेल की गुणवत्ता सुधारता है.

चाहे गेहूं हो, सरसों या आलू वैज्ञानिक तरीके अपनाने से उत्पादन में 20 से 25% तक बढ़ोतरी संभव है. उदाहरण के तौर पर, 1000 रुपये की लागत में अगर किसान 40 क्विंटल उत्पादन लेते हैं तो वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर 60 क्विंटल तक पैदावार पाई जा सकती है. आलू में नैनो डीएपी से कंद उपचार भी फायदेमंद है. इन आधुनिक तरीकों से किसान कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं.

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