बेकार नहीं है गाय का गोबर इससे बन रही गैस, किसान कर रहा लाखों की बचत!

0
बेकार नहीं है गाय का गोबर इससे बन रही गैस, किसान कर रहा लाखों की बचत!


Last Updated:

कौशांबी जिले के टेंगाई गांव के किसान रविंद्र कुमार पांडे ने गाय के गोबर को बायोगैस में बदलकर अपने घर और खेती की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया है. 2016 में उन्होंने दो 10-10 घन मीटर के बायोगैस टैंक स्थापित किए, जिनसे घर में खाना बनाने, आटा चक्की, इंजन और बिजली उपकरण चलाने तक की ऊर्जा मिलती है. बायोगैस का उपयोग एलपीजी गैस के डर और खर्च को पूरी तरह खत्म कर देता है.

कौशाम्बी. किसान अधिकतर गाय के गोबर को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन कौशांबी जिले के सिराथू तहसील अंतर्गत टेंगाई गांव के रहने वाले किसान रविंद्र कुमार पांडे ने इसी गोबर को कमाई और बचत का जरिया बना लिया है. किसान रविंद्र कुमार पांडे ने अपने घर पर बायोगैस प्लांट लगाया है. इस प्लांट में गाय के गोबर से गैस तैयार करते है, जिससे उनके घर का खाना बनता है और एलपीजी गैस पर होने वाला खर्च पूरी तरह से बच जाता है. एलपीजी गैस को घरों में इस्तेमाल करने में एक डर भी बना रहता लेकिन इस बायोगैस से तैयार की हुई गैस से किसी भी प्रकार का डर नहीं रहता है ना ही फटने का डर ना आग लगने का डर लगता है. यही नहीं बायोगैस से तैयार ऊर्जा का उपयोग करके वह बिजली भी तैयार कर रहे हैं. जिससे आटा चक्की, इंजन, घर में पंखा, लाइट और अन्य बिजली के उपकरण आसानी से चला रहा हैं. इस तरह से किसान साल भर में लाखों की बचत कर लेता है.

किसान रविंद्र कुमार पाण्डेय ने बताया की उन्होंने 2016 में बायोगैस का प्लांट तैयार किये है. वह लगातार 10 वर्षो से इस गैस का लाभ ले रहे है, घरों में ईंधन के इस्तेमाल करने के लिए बायोगैस का सहारा ले रहे है. केवल गैस से रसोई तक सीमित नहीं बल्कि इंजन आटा चक्की हुआ गैस से ही बिजली भी तैयार करते हैं जिससे विद्युत के लिए भी इस्तेमाल करते हैं. लोग गाय के गोबर को बेकार में समझ कर फेंक देते हैं लेकिन यह गोबर बहुत ही कमाल का है क्योंकि हम लोग लगभग 10 वर्षों से ही इस गाय के गोबर से ही निकले बायोगैस का सहारा लेकर गैस चूल्हा में खाना तैयार करते हैं. जितने भी गाय पाले हुए हैं उनके गोबर को प्रतिदिन जो टैंक बना हुआ है उसी में डाल दिया जाता है, जिससे सड़कर कर गैस तैयार होता है.

इस बायोगैस से ऐसी किसी भी प्रकार की समस्या नहीं

किसान रविंद्र कुमार पांडे ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के ऊर्जा बोर्ड तकनीक सहयोग जिलाधिकारी अखंड प्रताप सिंह के निर्देशों पर वर्ष 2016 में दो 10 -10 घन मीटर के बायोगैस टैंक तैयार किया गया था. इसका लाभ आज 10 वर्षों से ही लगातार ले रहे हैं जिससे हम लोग लगभग प्रतिवर्ष लाखों की बचत करते हैं. इस बायोगैस से हम लोग रसोई गैस तक पाइपलाइन ले गए हैं जिससे घरों का खाना भी बनाया जाता है हमेशा एलजी गैसों से एक डर बना रहता है कि कहीं लीकेज या फट न जाए लेकिन इस बायोगैस से ऐसी किसी भी प्रकार की समस्या नहीं है. बायोगैस तैयार करने से हमें ईंधन की किसी भी प्रकार की आवश्यकता नहीं होती है जब से यह गैस तैयार की गई है तभी से ना तो गैस लेने की आवश्यकता है ना बिजली की आवश्यकता है क्योंकि इसी बायोगैस से खाना तैयार तो किया जाता है. लेकिन जो गैस बचती है उसी को हम लोग इंजन में इस्तेमाल करके अपने घरों में बिजली के रूप में हम लोग इस्तेमाल करते हैं और बिजली की भी बचत करते हैं. अगर किसी व्यक्ति को इस गैस की आवश्यकता होती है तो उसे ट्यूब के माध्यम से गैस भी दिया जा सकता है जिससे अन्य लोग भी इस गैस का इस्तेमाल करके अपने घरों में रसोई गैस का इस्तेमाल कर सकते हैं.

किसान रविंद्र कुमार पांडे इसी बायोगैस से बिजली तैयार करके अपने घरों का समरसेबल एवं आटा चक्की भी चलाते हैं. जिससे एक इनकम भी प्राप्त करते हैं और दूसरी अपने घर की जरूरत को भी पूरा करते हैं. अधिकतर घरों में समरसेबल हो या आटे की चक्की को इस्तेमाल करने के लिए डीजल इंजन या बिजली की आवश्यकता पड़ती है. लेकिन हम लोग इस बायोगैस का सहारा लेकर पानी के लिए सबमर्सिबल हो या खेत सिंचाई करना हो इस तरह की जरूरत को पूरा कर लेते हैं. इस तरह से हमें ना तो बिजली का बिल देना होता है ना गैस सिलेंडर की जरूरत होती है. इस तरह से लगभग सालाना लाखों की बचत भी हो जाती है. बायोगैस को तैयार करने के लिए प्रतिदिन जानवरों से निकले हुए गोबर को दोनों बने हुए टैंक में डाल दिए जाते हैं और उसमे पानी का मिश्रण करके घोल तैयार करते हैं जिनको एक डंडे से मिलाते है. इसी तरह लगातार टैंक में गोबर डालते रहते हैं और लगातार निरंतर पाइप द्वारा रसोई घर तक गैस पहुंचती रहती है, क्योंकि इन दोनों गैस के लिए लोग परेशान हो रहे हैं लोग लाइनों में खड़े हो रहे हैं लेकिन मुझे किसी भी प्रकार की समस्या नहीं है क्योंकि मैं बायोगैस का सहारा ले रहा हूं.

About the Author

Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *