बेबी होने के बाद मां के जोड़ों में हो रहा है दर्द, ये 10 आयुर्वेदिक औषधि करेंगी रामबाण इलाज

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बेबी होने के बाद मां के जोड़ों में हो रहा है दर्द, ये 10 आयुर्वेदिक औषधि करेंगी रामबाण इलाज


सहारनपुर: प्रेगनेंसी के दौरान ही नहीं बल्कि डिलीवरी के बाद भी महिलाओं को तरह-तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती है. डिलीवरी के बाद जोड़ो और हड्डियों में काफी कमजोरी आ जाती है जिसका कारण है डिलीवरी के बाद शरीर में हारमोंस का असंतुलित होना. जिसमें गर्भाशय में तेज ऐंठन (Afterpains), पेट के निचले हिस्से में दर्द, पीठ में दर्द और शरीर की विभिन्न हिस्सों की हड्डियों में दर्द बना रहता है. यह दर्द आमतौर पर 2-3 दिनों तक रहता है, लेकिन कई महिलाओं में यह दर्द हमेशा के लिए उनके शरीर में रम जाता है.

ये आयुर्वेदिक पेड़ है फायदेमंद

महिलाओं की डिलीवरी के बाद हड्डियों में रहने वाले उस दर्द को खत्म करने के लिए एक ऐसा आयुर्वेदिक उपाय है जिसका इस्तेमाल करने से महिलाएं अपनी हड्डियों में रहने वाले उस दर्द से हमेशा के लिए छुटकारा पा सकती है. आयुर्वेद में 10 पेड़ जिनकी जड़े इस हड्डियों के दर्द को हमेशा के लिए खत्म करने और जच्चा के शरीर को पहले जैसा बनने में बेहद कारगर साबित होते हैं. उसमें सबसे पहले आता है बिल्व, अग्निमंथ, श्योनाक, पाटला, गंभारी, शालपर्णी, पृश्निपर्णी, बृहती, कंटकारी और गोक्षुर इन पेड़ों की जड़ों को निकाल कर उनका काढ़ा बनाकर अगर जच्चा को पिलाया जाएं तो जच्चा का शरीर कुछ ही दिनों में पूरे तरीके से रिकवरी कर लेता है.

काढ़ा बनाकार पीने से मिलता है आराम

आयास आयुर्वेदिक चिकित्सालय से बीएएमएस, एमडी डॉक्टर हर्ष ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि अक्सर देखने को मिलता है हमारे पास कई महिलाएं आती हैं. जिन्होंने बच्चों को जन्म दिया और जन्म देने के बाद उनके जोड़ों में दर्द रहना शुरू हो गया, काफी सारी समस्याएं महिलाओं को आ जाती है. तो अगर कोई महिला जिसने अभी बच्चे को जन्म दिया है कुछ दिन हुए हैं वो महिला अपने बच्चों को जन्म देने के बाद दशमूल का काढ़ा बनाकर के पीना शुरू कर दे या दशमूलारिष्ट जो की बाजार में बना बनाया मिलता है. इसका सेवन करना शुरू कर दे तो डेफिनेटली उसके जो यूटरस की वाल्व है उनको ताकत मिलती है, जोड़ों में दर्द की समस्या में समाधान मिल सकता है.

जड़ों का काढ़ा करता है फायदेमंद

दशमूल यह 10 तरह के पेड़ है जिनकी जड़ों का इस्तेमाल किया जाता है. जिनमें पहले है बृहद पंचमूल और दूसरे है लघु पंचमूल. बृहद पंचमूल में आते है बिल्व, अग्निमंथ, श्योनाक, पाटला, और गंभारी और लघु पंचमूल में आते है शालपर्णी, पृश्निपर्णी, बृहती, कंटकारी और गोक्षुर. यह 10 तरह के पेड़ है जिनकी जड़ों को अगर हम लेकर उसका काढ़ा बनाकर के इस्तेमाल करें या उसका दशमूलारिष्ट जो की बाजार में अवेलेबल है अलग-अलग कंपनियां बनाती हैं जैसे कि डाबर बनती है, बैद्यनाथ बनती है, झंडू बनती है अलग-अलग कंपनियों का अवेलेबल है आप किसी भी कंपनी का ले सकते हैं. इसके सेवन से आपके यूटरस की वॉल्व को भी मजबूती मिलती है और भविष्य में शरीर के जो जोड़ है उनमें दर्दों की संभावना बिल्कुल नहीं रहती.



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