भतीजे से मिला आइडिया, फिर किसान ने शुरू की यह खेती, चमक उठी किस्मत, कम लागत में हो रही बंपर कमाई
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Agriculture News: सुल्तानपुर के किसान ओम प्रकाश तिवारी ने पारंपरिक खेती छोड़कर स्ट्रॉबेरी की ऑर्गेनिक खेती शुरू की. 8 बिस्वा जमीन पर मल्चिंग विधि से वह मात्र 6 महीने में हजारों रुपये कमा रहे हैं. कम लागत और वैज्ञानिक सोच उनकी सफलता का राज है.
कहते हैं कि अगर दिल में हौसला और जुनून हो तो कोई भी आदमी किसी भी काम को आसानी से कर सकता है. इसी का उदाहरण पेश किया है सुल्तानपुर के रहने वाले एक किसान ने जिन्होंने ग्रेजुएट की पढ़ाई की है और अपने शिक्षा के बदौलत उसने अपनी वैज्ञानिक और आधुनिक सोच को खेती में शामिल किया और पारंपरिक खेती धान और गेहूं को छोड़कर स्ट्रॉबेरी की खेती करना शुरू किया और स्ट्रॉबेरी की खेती से अब वे मात्र 6 महीने में हजारों रुपए की कमाई कर रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं क्या है उनकी सफलता का राज.
इस तरह की स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू
किसान ओम प्रकाश तिवारी लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताते हैं कि उन्हें स्ट्रॉबेरी की खेती में कोई अनुभव नहीं था. वह सिर्फ पारंपरिक खेती धान और गेहूं की खेती करते थे लेकिन उनके भतीजे ने स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत कुछ वर्ष पहले की. जिसको देखकर उन्होंने यह ठाना कि उनको भी स्ट्रॉबेरी की खेती करना है और उन्हीं को देखकर ओम प्रकाश ने 8 बिस्वा में इसको लगाया. जो 6 महीने में हजारों रुपए की पैदावार कर रहा है.
रसायन मुक्त करते हैं खेती
किसान ओम प्रकाश तिवारी स्ट्रॉबेरी की खेती को रसायन मुक्त तरीके से तैयार करते हैं और ऑर्गेनिक खेती में शामिल किए जाने वाले सभी विशेषताओं को अपने इस स्ट्रॉबेरी की पैदावार में इस्तेमाल करते हैं जिससे इनके द्वारा पैदा किया गया स्ट्रॉबेरी पूरी तरीके से ऑर्गेनिक होता है. जिसे खाने में किसी भी प्रकार की बीमारियों से बचा जा सकता है.
होती है इतनी कमाई
ओम प्रकाश तिवारी मशरूम की यह खेती पिछले वर्ष से कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि वह प्रत्येक वर्ष सर्दी के सीजन में लगभग 1 लाख रुपए से अधिक स्ट्रॉबेरी की पैदावार करते हैं. जिसमें लागत मात्र 10 हजार रुपए की होती है. वे स्ट्रॉबेरी की खेती को मल्चिंग विधि से करते हैं. ओम प्रकाश ग्रेजुएट की डिग्री हासिल कर चुके हैं उनकी तत्परता और वैज्ञानिक सोच से आज वे स्ट्रॉबेरी की खेती करने में सफल हुए हैं.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें