मथुरा में बिजली के बाक्स बने जानलेवा, 50 फीसदी से अधिक जगहों पर मंडराया खतरा, लापरवाही उजागर
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Mathura News: मथुरा में भूमिगत बिजली लाइनों के खुले और जर्जर बॉक्स लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं. 50 फीसदी से अधिक इलाकों में बॉक्स खुले पड़े हैं. बारिश में स्थिति और भयावह हो जाती है, लेकिन शिकायतों के बावजूद बिजली विभाग ध्यान नहीं दे रहा.
उत्तर प्रदेश के मथुरा में बिजली विभाग की गंभीर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है. शहर में जहां-जहां बिजली की लाइनों को भूमिगत किया गया है, वहां लगे केबल बॉक्स कई जगहों पर खुले और जर्जर हालत में पड़े हुए हैं. ये खुले बिजली बॉक्स न केवल विभागीय उदासीनता को उजागर करते हैं, बल्कि किसी बड़े हादसे को भी खुला न्योता दे रहे हैं.
स्थानीय लोगों के अनुसार, मथुरा महानगर के 50 प्रतिशत से अधिक इलाकों में भूमिगत बिजली लाइनों के बॉक्स खुले पड़े हैं. डैंपियर नगर क्षेत्र की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है, जहां राजकीय संग्रहालय के बाहर ही तीन बिजली बॉक्स पूरी तरह जर्जर अवस्था में हैं. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ये बॉक्स लंबे समय से खराब हालत में हैं, लेकिन बिजली विभाग के अधिकारी केवल निरीक्षण कर औपचारिकता निभाकर लौट जाते हैं.
स्थानीय निवासी संजय बंसल ने बताया कि रोजाना हजारों लोग इस रास्ते से गुजरते हैं, जिनमें बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल हैं. खुले बॉक्स और नंगे तारों से हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है. उनका कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
स्थानीय महिलाओं मधु, सीमा और राजबाला ने बताया कि नालियों में नंगे बिजली के तार पड़े हुए हैं, जिनमें लगातार करंट प्रवाहित हो रहा है. बारिश के मौसम में स्थिति और भयावह हो जाती है. पानी भरने पर करंट फैलने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो जाता है. महिलाओं का कहना है कि डर हमेशा बना रहता है कि कहीं किसी दिन बड़ा हादसा न हो जाए.
एक अन्य स्थानीय युवक मनीष अग्रवाल ने बताया कि भूमिगत लाइन बिछाने के बाद से ही क्षेत्र में समस्याएं बढ़ गई हैं. कई बिजली बॉक्स पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं और समय रहते मरम्मत न होने के कारण खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है.
स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग से जल्द से जल्द सभी खुले और क्षतिग्रस्त बिजली बॉक्स को दुरुस्त कराने, नंगे तारों को सुरक्षित करने और नियमित निरीक्षण की व्यवस्था लागू करने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह विभाग की होगी.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें