महाभारत काल की यादें समेटे गोंडा का पावन झाली धाम आश्रम, आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम
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Gonda News: यूपी के गोंडा जिले में स्थित झाली धाम आश्रम का इतिहास बेहद रोचक और पुराना है. मंदिर के महंत स्वामी नरसिंह दास ब्रह्मचारी ने बताया कि इस स्थान का संबंध महाभारत काल से बताया जाता है. मान्यता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के समय इस क्षेत्र में कुछ समय बिताया था.
गोंडा: उत्तर प्रदेश गोंडा जिले में स्थित झाली धाम आश्रम एक ऐसा धार्मिक स्थल है, जिसे लोग महाभारत काल से जुड़ा मानते हैं. यह आश्रम श्रद्धा, विश्वास और प्राचीन इतिहास की यादों को संजोए हुए है. दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजा के लिए आते हैं.
लोकल 18 से बातचीत के दौरान मंदिर के महंत स्वामी नरसिंह दास ब्रह्मचारी ने बताया कि इस स्थान का संबंध महाभारत काल से बताया जाता है. मान्यता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के समय इस क्षेत्र में कुछ समय बिताया था. उसी समय से यह स्थान तप और साधना की भूमि माना जाता है. यहां की शांति और प्राकृतिक वातावरण लोगों को आध्यात्मिक अनुभव कराता है.
किसने कराया था स्थापना
इस मंदिर की स्थापना श्री श्री 108 स्वामी राममिलन दास महाराज जी ने की थी. लोगों का मानना है कि राममिलन दास महाराज जी 24 वर्ष ओवी में रहकर साधना प्राप्त की थी. महाराज 34 साल तक किसी भी व्यक्ति से नहीं मिले थे, केवल भगवान का भजन और साधना करते थे.
शांत मनोरम तपोवन आश्रम झाली धाम महंत स्वामी नरसिंह दास ब्रह्मचारी ने बताया कि इस तपोभूमि का पृष्ठभूमि महाभारत काल से जुड़ा हुआ है. इस भूमि का पहला नाम था ‘एक चक्र’. धीरे-धीरे इस भूमि का नाम पड़ा ‘बेल चक्र’. इस मंदिर का निर्माण होने के बाद इस मंदिर का नाम पड़ा ‘शांत मनोरम तपोवन आश्रम झाली धाम’.
कब हुआ मंदिर का निर्माण
महंत स्वामी नरसिंह दास ब्रह्मचारी ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण 1965 से लेकर 1970 तक चला. उसके बाद मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा हुई और फिर मंदिर के गर्भगृह में ठाकुर जी की स्थापना की गई. महाराज राम मिलन दास जी 1970 से 1976 तक इस संसार कल में रहे. 1976 में उन्होंने इस मंदिर को ट्रस्ट बनाया और 1977 जून में महाराज जी ने यौगिक क्रिया के द्वारा अपने पार्थिव शरीर को त्याग दिया.
आश्रम में होते हैं विभिन्न पर्व
महंत स्वामी नरसिंह दास ब्रह्मचारी ने बताया कि झाली धाम आश्रम में तीन पर्व बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं. वैशाख शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को यज्ञ पर्व मनाया जाता है, आषाढ़ के पूर्णिमा पर गुरु पर्व और कार्तिक शुक्ल पक्ष को परिक्रमा पर्व मनाया जाता है. इसमें विशाल भंडारा होता है.
महंत स्वामी नरसिंह दास ब्रह्मचारी ने बताया कि इसकी पृष्ठभूमि महाभारत काल से जुड़ी हुई है. महंत स्वामी नरसिंह दास ब्रह्मचारी ने बताया कि यहां पर कई ऋषियों ने तपस्या किया है. महर्षि जावाल, महर्षि दीर्घतमा और महर्षि महर्षि त्रित नाम के महर्षियों ने यहां पर तपस्या किया है.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.
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