मां-बाप बने सहारा, फिर अंधे बेटे ने सपने किए पूरे, आज बच्चों को दे रहा ज्ञान, दिव्यांग शिक्षक की अनोखी कहानी

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मां-बाप बने सहारा, फिर अंधे बेटे ने सपने किए पूरे, आज बच्चों को दे रहा ज्ञान, दिव्यांग शिक्षक की अनोखी कहानी


अमेठी: ‘जहां जाएगा रोशनी लूटाएगा, किसी चिराग का अपना मकां नहीं होता’, यह कथावत अमेठी के रहने वाले एक दिव्यांग शिक्षक पर सटीक बैठती है. अमेठी का ये शिक्षक बार-बार मुसीबतों से लड़ता रहा, लेकिन उसने हर मुसीबत का डटकर मुकाबला किया और हार मानने के बजाय अडिग रहा. इसके बाद अपने जीवन को बेहतर बनाकर अपने लिए सफलता की राह खोल दी. आइए इस दिव्यांग शिक्षक के बारे में और उनकी संघर्ष की कहानी के बारे में जानते हैं.

अमेठी जिले के अमेठी तहसील बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक विद्यालय ताला में तैनात शिक्षक जय सिंह सैनी मेरठ जिले के रहने वाले हैं और उनकी तैनाती अमेठी जिले में हुई है. कम उम्र में उनकी आंखें चली गई. माता-पिता ने कई बार चिकित्सकीय परीक्षण कराया, लेकिन सफलता नहीं मिली. आखिर में थक-हारकर माता-पिता ने इसे स्वीकार करते हुए पालन-पोषण शुरू कर दिया. खास बात यह रही कि माता-पिता ने कभी उन्हें बोझ नहीं समझा और उनकी हर पल मदद करते रहे.

3 वर्ष में चली गई आंखें, यह है पूरा घटनाक्रम

शिक्षक जय सिंह सैनी की 3 वर्ष में ही दोनों आंखें चली गई . इसके बाद उन्होंने शुरुआती शिक्षा राष्ट्रीय दृष्टिबाधित केंद्र संस्थान देहरादून में रहकर की. 1993 से 2006 तक वह इस संस्थान में पढ़ते रहे, जहां पर अध्यापकों ने भी इनका पूरा सहयोग किया. 2006 से 2016 तक दिल्ली विश्वविद्यालय में उन्होंने परास्नातक तक की पढ़ाई पूरी की. 2014 में उन्होंने टेट का एग्जाम क्वालीफाई किया और उसके बाद 2016 में बतौर शिक्षक के तौर पर उनकी नियुक्ति हो गई.

मुसीबत से डटकर किया मुकाबला

दिव्यांग शिक्षक जय सिंह सैनी ने बातचीत में बताया कि उन्हें ना तो परिवार ने कभी बोझ समझा, ना ही जिस विद्यालय में उन्होंने पढ़ाई की, वहां पर अध्यापकओं और उनके सहपाठयों ने. हर पल सब उनकी मदद करते रहे, जिसके कारण उन्होंने जिंदगी में आई हर मुसीबत का डटकर मुकबला किया. उन्होंने कहा कि जिंदागी में कभी किसी मुसीबत से हार नहीं माननी चाहिए और उसका डटकर मुकाबला करना चाहिए, क्योंकि जीवन में संघर्ष से सफलता की राह बनाई जा सकती है.

चला लेटे हैं कई गैजेट्स

दोनों आंखों से दिव्यागं होने के बावजूद भी शिक्षक जय सिंह सैनी मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट, सब कुछ फर्राटे से चला लेते हैं. बच्चों को पढ़ने में वह अपनी आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल भी करते हैं. उन्हें कभी किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होती है.



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