माता प्रसाद पांडेय और संजय निषाद के बीच कैसी रंजिश? सीएम योगी आदित्यनाथ ने यूपी विधानसभा में किया इशारा
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Sanjay Nishad vs Mata Prashad Pandey: उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर उस वक्त गरमा गई जब विधानसभा सत्र के दौरान माता प्रसाद पांडेय और संजय निषाद के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली. आरक्षण और सामाजिक मुद्दों पर चल रही बहस अचानक व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप में बदल गई, जिससे सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया. इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी ने और राजनीतिक मायने जोड़ दिए. उनके बयान को विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बढ़ती खींचतान के संकेत के रूप में देखा गया.
माता प्रसाद पांडेय बनाम संजय पांडेय
लखनऊ: आजकल यूपी की पॉलिटिक्स में दो नाम काफी चर्चाओं में बने हुए हैं. एक माता प्रसाद पांडे और दूसरा संजय निषाद. इन दोनों के बीच कोई नई रंजिश है या पुरानी अदावत? ये सवाल खड़ा हो गया है. दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे और मंत्री संजय निषाद के बीच हुई बहस पर चुटकी ली थी. उन्होंने कहा था कि लगता है कि संजय निषाद जी ने आपकी पोखरि का भी ठेका दे दिया. उनके इतना ही कहते सियासी गलियारे में चर्चा शुरू हो गई कि ऐसी क्या दोनों नेताओं के बीच रंजिश चल रही है… मगर, अब सारे बयानों और बीते कुछ समय को देखें तो हाल ही में माता प्रसाद पांडेय और संजय निषाद के बीच कोई निजी या लंबी-चौड़ी रंजिश का मामला नहीं है, बल्कि यह विवाद उत्तर प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही के दौरान हुई बहस और राजनीतिक टकरावों से जुड़ा है.
क्या बोले थे सीएम योगी?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था, आप में और संजय निषाद में किस बात को लेकर रंजिश चल रही है मुझे नहीं पता. लगता है उन्होंने आपके पोखरे का भी ठेका देकर आए हैं. उन्होंने महर्षि वेद व्यास के एक श्लोक का जिक्र करते हुए राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष के रवये पर कहा था, मां के समान कोई छाया नहीं, कोई सहारा नहीं, कोई रक्षक नहीं, कोई प्रिय नहीं. ऐसी मातृशक्ति के सामने आपके सदस्यों का आचरण अच्छा नहीं था. उन्होंने आगे कहा कि गालिब,उम्र भर मैं ये भूल करता रहा, धूल चेहरे पर थी मैं आईना साफ करता रहा.
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और कैबिनेट मंत्री संजय निषाद के बीच हुई टकराव के ये दो पहलू सामने आए हैं…
- विधानसभा में आरक्षण व शब्दों को लेकर बहस
13 फरवरी 2026 को उत्तर प्रदेश विधानसभा में आरक्षण के मुद्दे पर बहस के दौरान दोनों नेता के बीच तीखी नोक-झोंक हुई. रिपोर्ट के अनुसार, बहस के दौरान पांडेय ने कुछ ऐसा कहा जिसे सत्ता पक्ष के कुछ सदस्य और संजय निषाद ने आपत्तिजनक/जातिगत शब्द बताया, जिसपर निषाद भड़क गए और हंगामा खड़ा हो गया. सदन में गर्मजोशी और शब्दों के चयन को लेकर विवाद बढ़ता चला गया. - पहले भी विधानसभा में ऐसे विवाद दर्ज
पिछले साल भी संजय निषाद ने सपा और उससे जुड़े नेताओं पर टिप्पणी की थी कि समाजवादी पार्टी फूलन देवी की हत्या के मामले में दोषी है, जिसे माता प्रसाद पांडेय ने विधानसभा में गलत बताया और आपत्ति जताई थी, जिससे हंगामा हुआ था.
इससे साफ है कि यह कोई पुराना वैयक्तिक विवाद नहीं, बल्कि विधानसभा में सामने आए राजनीतिक टकराव और भाषा के इस्तेमाल को लेकर हुई बहस का परिणाम है.
ये थी पूरी बहस
दरअसल, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे ने मंत्री संजय निषाद से कहा था आप अपनी बिरादरी का आरक्षण क्यों नहीं करा सके? ये हमेशा आरक्षण की बात करते हैं. आरक्षण दिला कर इनकी बोलती बंद कर दीजिए. आरक्षण पर “पिछड़े पाएं सौ में साठ” का नारा मैंने भी लगाया है. संजय निषाद के बेटे के लिए मैं दो महीने तक गांव-गांव चक्कर लगाया. मैंने केवट के बेटे से पूछा तुम चमार बनोगे तो वो बिगड़ गया. माता प्रसाद पांडे के इस बयान पर मंत्री संजय निषाद ने आपत्ति जताई थी और कहा था कि इन्होंने जिन शब्दों का इस्तेमाल किया उसे कार्यवाही से हटाया जाए.
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Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें