मिट्टी और गाद से बना काशी का सबसे फेमस स्पॉट! जानिए अस्सी घाट की कहानी
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Varanasi Famous Tourist Place: वाराणसी अपने ऐतिहासिक और आध्यात्मिक घाटों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. इन्हीं घाटों में एक है असि घाट, जिसे आम बोलचाल में अस्सी घाट कहा जाता है. कभी यहां मिट्टी और गाद का अंबार लगा रहता था, लेकिन आज यही स्थान काशी का प्रमुख पर्यटन और आकर्षण केंद्र बन चुका है, जहां रोज हजारों पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं.
सुबह हो या शाम इस घाट पर पर्यटकों की भारी भीड़ रहती है. इस घाट पर अलग-अलग समय अलग-अलग तरह का माहौल देखने को मिलता है. यह घाट आध्यात्मिक केंद्र के साथ फेमस टूरिस्ट और फेमस पिकनिक स्पॉट भी है.

सुबह के वक्त अस्सी घाट पर घण्टे घड़ियाल की आवाज के बीच सुबह-ए-बनारस का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. यहां सुबह के वक्त भी मां गंगा की भव्य आरती होती है. इसके अलावा हवन पूजन का दौर भी चलता है.

इसके अलावा सूर्य की पहली किरण का स्वागत इस घाट पर सांस्कृतिक महोत्सव से होता है. अलग-अलग दिन अलग-अलग कलाकार यहां अपनी प्रस्तुति देतें है. भोर में 5 बजे से 8 बजे तक यह दौर देखने को मिलता है.
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वहीं, दिन चढ़ने के साथ यहां पर्यटकों के साथ स्थानीय लोगों की खासी भीड़ होती है. लोग यहां सुकून के पल और काशी के अर्द्धचंद्राकर स्वरूप को निहारने के लिए यहां आते हैं. यहां लोग कुल्हड़ मैगी के साथ कुल्हड़ वाली चाय का स्वाद भी चखतें है.

इस घाट पर बच्चों के मस्ती की भी फूल व्यवस्था है. यहां घाट पर बैटरी वाले कार के अलावा कई झूलें भी लगें हुए है. जहां लोग पूरे दिन मस्ती करतें नजर आतें है.

वहीं, शाम होने के साथ यहां फिर गंगा आरती होती है. सात बटुकों की ओर से होने वाले इस महाआरती को देखने के लिए देशभर से श्रद्धालु यहां आते है. इस आरती में हर रोज हजारों लोग शामिल होतें है.

असि घाट गंगा और असि नदी का संगम स्थल है. यहां स्नान से हर तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है. पौराणिक मान्यता है कि दैत्य शुम्भ निशुम्भ के वध के बाद देवी दुर्गा ने जहां अपनी तलवार फेंकी थी वहां से असि नदी का उद्गम हुआ था.

साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी असि घाट पर फावड़ा चलाकर स्वच्छता अभियान का आगाज किया था. जिस समय पीएम ने यहां फावड़ा चलाया था. उस समय यहां मिट्टी और गाद का अंबार था. लेकिन, पीएम मोदी के फावड़ा चलाने के बाद इस घाट की तस्वीर बदल गई थी.