मिर्जापुर में विचारों की संक्रांति! होटल में खाना और उड़ाने के लिए पतंग, इन युवाओं ने गरीब बच्चों के साथ मनाया मकर संक्रांति
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Mirzapur News: मिर्जापुर में 8 युवाओं का एक ग्रुप है, जिनमें धर्मेश दुबे, अमित दुबे, प्रवीण दुबे, अमित श्रीनेत, राजेश, गौड़, हिमांशु केशरवानी, प्रतीक पांडेय व जितेंद्र दुबे आदि शामिल है. इनके द्वारा हर वर्ष मकर संक्रांति पर विचारों की संक्राति के लिए नेक पहल करते हैं. इसके तहत गरीब बच्चों को न सिर्फ होटल लेकर जाते हैं. बल्कि, पकवान ख़िलाने के साथ ही उनको पतंग व गुड़ से बने स्वादिष्ट सामानों को भी दान में देते हैं. 100 से ज्यादा बच्चों की अलग-अलग जगहों पर मदद करते हैं.
Makar Sankranti with poor children: मकर संक्रांति का पर्व दान का पर्व माना जाता है. कहते है कि आज के दिन किया गया दान लंबे समय तक फल देता है, इससे न सिर्फ विचारों की संक्राति होती है. बल्कि, गरीबों की भी मदद हो जाती है. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में कुछ युवाओं का ग्रुप पिछले 5 वर्षों से गरीबों के साथ मकर संक्राति का पर्व मना रहा है. यह ऐसे बच्चे है जो त्योंहार को भूल चुके हैं. उनके सामने रोटी की जंग रहती है. सभी ऐसे बच्चों को न सिर्फ इकट्ठा करते हैं. उन्हें होटल में बेहतरीन खाने के साथ ही पतंग इत्यादि उपलब्ध कराते हैं. इसके पीछे का उनका विचार नेक है और संदेश बड़ा है. उनका मानना है कि दान के इस महापर्व पर हम उनकी मदद करें जो इस काबिल नहीं है कि त्यौहार मना सके. गरीब बच्चों की मुस्कान से ही हमारी मुस्कान है. हमें बहुत खुशी महसूस होती है.
मिर्जापुर में 8 युवाओं का एक ग्रुप है, जिनमें धर्मेश दुबे, अमित दुबे, प्रवीण दुबे, अमित श्रीनेत, राजेश, गौड़, हिमांशु केशरवानी, प्रतीक पांडेय व जितेंद्र दुबे आदि शामिल है. इनके द्वारा हर वर्ष मकर संक्रांति पर विचारों की संक्राति के लिए नेक पहल करते हैं. इसके तहत गरीब बच्चों को न सिर्फ होटल लेकर जाते हैं. बल्कि, पकवान ख़िलाने के साथ ही उनको पतंग व गुड़ से बने स्वादिष्ट सामानों को भी दान में देते हैं. 100 से ज्यादा बच्चों की अलग-अलग जगहों पर मदद करते हैं. विचारों में परिवर्तन के पहल में हर वर्ष मददगारों की संख्या बढ़ रही है. उनका मानना है कि मदद को इसलिए दिखाया जाता है. ताकि, इससे एक व्यक्ति भी प्रभावित होगा तो 5 से ज्यादा बच्चों को मदद मिल जाएगी.
है नेक पहल- प्रवीण
प्रवीण दूबे ने बताया कि हर वर्ष हम नन्हे-मुन्ने बच्चों के साथ मकर संक्रांति का पर्व मनाते हैं. इसके पीछे का उद्देश्य यह है कि हम लोगों के द्वारा होटल या ढाबों में खाते हैं. जो बच्चे कभी होटल और ढाबा नहीं गए हो, उनको हम लोग लेकर आते हैं और यहां पर घुमाने के बाद लजीज व्यंजन भी खिलाते हैं. हर वर्ष हम लोगों के द्वारा मकर संक्रांति के अलावा होली व दिवाली आदि पर भी मदद करते हैं. बस यहीं उम्मीद है कि इससे अन्य लोग भी प्रभावित हो और लोगों की मदद हो सके.
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काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें