मुगलसराय में नहाय-खाय को लेकर बढ़ा लौकी का दाम, जानें क्या है बाजार का रेट

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मुगलसराय में नहाय-खाय को लेकर बढ़ा लौकी का दाम, जानें क्या है बाजार का रेट


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Chhath Puja 2025: छठ व्रती मंजू केशरी ने लोकल 18 से कहा कि इस इलाके में बड़े पैमाने पर लौकी की खेती होती है. जिसके वजह से सस्ते दर पर यहां लौकी उपलब्ध हो जाता था. कल छठ महापर्व के नहाय खाय को लेकर महंगे दर पर बेचा जा रहा है. पहले 30 से 40 रुपए किलो में बेचते थे

चंदौली जिले में छठ महापर्व को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है. कल दिन शनिवार से छठ महापर्व नहाय खाय से शुरू हो रहा है. छठ व्रत करने वाले लोग लौकी का प्रसाद बनाकर कल ग्रहण करेंगे. जिसकी वजह से मार्केट में लौकी ही लौकी नजर आ रहा है. श्रद्धालु महिला-पुरुष इसी लौकी का प्रसाद बनाकर ग्रहण करते हैं. जिसकी वजह से मार्केट में लौकी का डिमांड अधिक हो गया है. किसान सामान्य दर से कई गुना महंगे दर पर लौकी बेचकर मोटी कमाई करते हैं.

किसान बड़े पैमाने पर लौकी का खेती करते हैं. जहां लौकी काफी सस्ते दर पर भी मिलती है.लेकिन सामान्य दिन की अपेक्षा लौकी का दाम काफी ज्यादा है. किसान 20 से 25 रुपए किलो में लौकी बेच देते हैं, लेकिन छठ महापर्व के नहाय खाय को लेकर किसान मार्केट में लौकी 30 से 35 रुपए किलो में बेच रहे हैं, जबकि होलसेल दुकानदार छोटे दुकानदारों से लौकी 45 से 55 रूपए किलो में बेच रहे हैं, ऐसे देखा जाए तो मुगलसराय की मार्केट में 50 से 60 रुपए किलो में लौकी बिकने वाली है.

50 रूपए किलो में बेचा जा रहा लौकी
फल-सब्जी व्यवसायी वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष चौधरी नारायण प्रसाद सोनकर ने लोकल 18 से बताया कि सामान्य दिन के अपेक्षा लौकी मंहगे दर हम लोग बेच रहे हैं. छठ महापर्व को लेकर नहाय खाय के दिन इसी का प्रसाद बनाकर श्रद्धालु ग्रहण करते हैं. जिसकी वजह से इसका मांग बढ़ जाता है. यही वजह है कि लौकी महंगे दर पर लोग बेचकर अच्छा पैसा कमाते हैं. पहले 40 से 50 रुपए किलो में बेचते थे, लेकिन आज 50 से 60 रूपए किलो में लौकी बेचा जा रहा है.

काफी महंगे दर पर बेचा जा रहा है लौकी
छठ व्रती मंजू केशरी ने लोकल 18 से बताया कि इस इलाके में बड़े पैमाने पर लौकी की खेती होती है. जिसके वजह से सस्ते दर पर यहां लौकी उपलब्ध हो जाता था, लेकिन कल छठ महापर्व के नहाय खाय को लेकर महंगे दर पर बेचा जा रहा है. पहले 30 से 40 रुपए किलो में बेचते थे, लेकिन आज लौकी 80 रूपए किलो में बेचा जा रहा है.

पहले दिन बनाया जाता है लौकी-भात 
दिवाली के बाद छठ महापर्व की शुरुआत होती है. 4 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में व्रती निर्जला व्रत रखती हैं. यह व्रत खासतौर से सूर्य देव और छठी मईया के नाम से जाना जाता है. छठ महापर्व शुरू होते ही घरों में सुबह से ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं. ‘नहाय-खाय’ यानी छठ पूजा का पहला दिन. इस दिन भक्त पवित्र स्नान करके सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं, जिसमें खासतौर से लौकी की सब्जी और चावल (लौकी-भात) बनाया जाता है. छठ पूजा बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़े श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाती है.

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