मेरठ का पवित्र गगोल तीर्थ, छठ के अवसर पर श्रद्धालुओं की लगी भीड़, देखें फोटो
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छठ महापर्व को लेकर मेरठ का गगोल तीर्थ आस्था के रंग में रंग चुका है. नहाय-खाय से शुरू होने वाले इस पावन पर्व के लिए यहां सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. हर साल की तरह इस बार भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु गगोल तीर्थ पहुंचकर विधि-विधान से छठ मैया की पूजा-अर्चना करेंगे. सरोवर किनारे बने वेदियों पर भक्तजन सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे.
छठ पर्व की तैयारियां मेरठ में भी जोरों पर हैं, गगोल तीर्थ पर श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारियां अंतिम चरण में हैं. यहां नहाय-खाय से लेकर अर्घ्य तक के सभी अनुष्ठानों के लिए प्रशासन और समितियों ने विशेष इंतज़ाम किए हैं ताकि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के छठ पूजा कर सकें.

महंत शिवदास महाराज के मुताबिक, गगोल तीर्थ न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से बल्कि ऐतिहासिक महत्व से भी जुड़ा हुआ है. यह वही स्थान है जहां महर्षि विश्वामित्र ने सप्त ऋषियों संग तपस्या की थी. उन्होंने बताया कि यह भूमि रावण की पत्नी मंदोदरी के पिता ‘मय’ का क्षेत्र मानी जाती है, इसलिए यहां की पवित्रता और भी बढ़ जाती है.

महंत शिवदास महाराज बताते हैं कि उस समय राक्षस प्रजाति के लोग यज्ञ संपन्न नहीं होने देते थे. ऐसे में महर्षि विश्वामित्र भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ गगोल तीर्थ लेकर आए थे, ताकि वे राक्षसों का वध कर यज्ञ की रक्षा कर सकें. भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ने महर्षि की इच्छा अनुसार सभी राक्षसों का अंत कर यज्ञ को सफलतापूर्वक पूरा कराया. तभी से यह स्थान सनातन धर्म में पवित्र और ऐतिहासिक तीर्थ स्थल के रूप में पूजनीय माना जाता है.

महंत शिवदास महाराज बताते हैं कि गगोल तीर्थ पर एक विशाल सरोवर भी स्थित है, जिसकी उत्पत्ति भगवान श्रीराम ने अपने तीर से की थी. कहा जाता है कि यह सरोवर अत्यंत पवित्र है और इसके जल का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है. इसी कारण हर साल छठ महापर्व के दौरान इस सरोवर के चारों ओर नहाय-खाय के साथ पूजा-अर्चना करने के लिए न केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश बल्कि दिल्ली और आसपास के राज्यों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं.

उन्होंने बताया कि गगोल तीर्थ पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष वेदियां बनाई गई हैं, ताकि सभी भक्त अपने स्थान पर बैठकर विधि-विधान से छठ मैया की पूजा-अर्चना कर सकें. छठ के इस पावन पर्व पर यहां आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है, जब हजारों श्रद्धालु सरोवर में खड़े होकर उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं और छठ मैया से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.

दरअसल, जब भी कोई श्रद्धालु गगोल तीर्थ पहुंचता है, तो उसे यहां वह ऐतिहासिक यज्ञशाला अवश्य दिखाई देती है, जिसके यज्ञ को पूर्ण कराने के लिए स्वयं भगवान श्री राम मेरठ की इस पवित्र भूमि पर आए थे. यहां स्थापित मूर्तियों में महर्षि विश्वामित्र को सप्त ऋषियों के साथ यज्ञ करते हुए दर्शाया गया है, जबकि भगवान श्री राम और लक्ष्मण उनके समीप विराजमान हैं, मानो वह दिव्य क्षण आज भी जीवंत हो.

बताते चलें कि मेरठ में वैसे तो कई स्थानों पर छठ पर्व के मौके पर श्रद्धालु पूजन-अर्चन करते हैं, लेकिन गगोल तीर्थ का महत्व सबसे अलग है. यहां हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से आकर छठ मैया की पूजा करते हैं. आस्था के इस महापर्व पर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मेरठ प्रशासन भी विशेष सतर्क रहता है और गगोल तीर्थ परिसर में सफाई, सुरक्षा और रोशनी सहित सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के लिए लगातार निगरानी करता है.

सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए गगोल तीर्थ पर इस बार भी बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की जा रही है ताकि श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के दौरान किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. वहीं मेरठ नगर निगम सहित प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थल का निरीक्षण कर रहे हैं ताकि साफ-सफाई, रोशनी, बैरिकेडिंग और अन्य व्यवस्थाएं पूरी तरह सुचारू रहें और श्रद्धालु निर्बाध रूप से छठ पर्व की आस्था में डूब सकें.