मेरठ की सड़कों से क्यों हटने लगी सीएनजी बसें, बोर्ड स्टूडेंट्स के सामने आ सकता है ये संकट

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मेरठ की सड़कों से क्यों हटने लगी सीएनजी बसें, बोर्ड स्टूडेंट्स के सामने आ सकता है ये संकट


Agency:News18 Uttar Pradesh

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सांकेतिक फोटो

मेरठ: सिटी ट्रांसपोर्ट के अंतर्गत मेरठ से संबंधित विभिन्न रूटों पर चलने वाली 97 सीएनजी बसों में से 55 बसें निर्धारित अवधि पूरा कर चुकी हैं. ऐसे में एनजीटी के दिशा-निर्देशानुसार उनका संचालन बंद कर दिया गया है. जल्द ही अन्य बसों की निर्धारित अवधि भी समाप्त हो जाएगी. इसके बाद मेरठ के विभिन्न रूटों पर चलने वाली सीएनजी बसें बंद हो जाएंगी. इससे एक तरफ बस चालकों और परिचालकों के सामने रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है. दूसरी तरफ बोर्ड परीक्षाएं भी शुरू होने वाली हैं. इससे ग्रामीण क्षेत्र के स्टूडेंट्स के सामने काफी चुनौतियां उत्पन्न होने वाली हैं. बोर्ड परीक्षा के लिए उन्हें अपने परीक्षा सेंटर पहुंचने में कठिनाई हो सकती है. इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए लोकल-18 की टीम ने ग्राउंड पर जाकर रियलटी पता की.

लाखों यात्री करते हैं सफर
मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट के अंतर्गत खरखौदा, मोदीपुरम, मोदीनगर, किठौर, शाहजहांपुर, हस्तिनापुर और सरधना सहित विभिन्न रूट पर 150 से अधिक बस का संचालन प्रतिदिन सिटी ट्रांसपोर्ट के अंतर्गत किया जाता है. इसमें 97 सीएनजी, 8 वोल्वो और 50 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं. सबसे ज्यादा यात्री सीएनजी बसों का ही उपयोग करते हुए दिखाई देते हैं. अन्य बसों के मुकाबले इनका किराया काफी कम रहता है लेकिन जिस तरीके से इन बसों की निर्धारित समय अवधि पूरी होती जा रही है उन्हें हटा दिया जा रहा है. 55 बस रूट से हटा दी गई हैं. जल्द ही अन्य बसों का संचालन भी बंद हो जाएगा. इसके बाद पूरा दामोदर 50 इलेक्ट्रिक और 8 वोल्वो बस के ऊपर आ जाएगा.

इसे लेकर अब विभागों में भी बैठकों का दौर शुरू हो गया है. चालक मोहम्मद इदरीश ने बताया प्रत्येक वर्ष पर दो चालक परिचालकों की व्यवस्थाएं रहती हैं ताकि बसें निर्धारित रूप से चलती रहें. इसी तरह से इन बसों के मेंटेनेंस को लेकर भी काफी बड़ी संख्या में वर्करों की तैनाती होती है. उन सभी के सामने एक संकट उत्पन्न हो गया है.

यात्रियों को नहीं होने देंगे असुविधा
मेरठ क्षेत्र के यूपीएसआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक संदीप कुमार नायक का कहना है कि यात्रियों को किसी भी प्रकार से दिक्कत ना हो उसे लेकर प्लान तैयार किया जा रहा है. जिन रूटों से बस हटाई गई हैं या हटाई जा रही हैं वहां इलेक्ट्रिक बस की व्यवस्था करते हुए उनके फेरे बढ़ाए जाएंगे. इसके लिए सर्वे कराया जा रहा है और शासन को भी इस बारे में अवगत कराया जा रहा है. मेरठ को 50 इलेक्ट्रिक बस दिलाने का भी प्रयास किया जा रहा है.

क्षेत्रीय प्रबंधक के अनुसार हर माह लगभग 6 लाख यात्री सिटी ट्रांसपोर्ट के अंतर्गत सफर करते हुए दिखाई देते हैं. बताते चलें की बोर्ड परीक्षाओं से पहले इस समस्या का समाधान नहीं किया तो छात्रों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.

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मेरठ की सड़कों से क्यों हटने लगी सीएनजी बसें?



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