मेरठ के बल्लों का जलवा बरकरार! टी-20 वर्ल्ड कप में खिलाड़ियों की पहली पसंद बने
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टी-20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम कर लिया. पूरे टूर्नामेंट में दमदार बल्लेबाजी के बाद फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर टीम इंडिया ने जीत दर्ज की. इस मुकाबले के दौरान एक बार फिर मेरठ में बने क्रिकेट बल्लों की धमक देखने को मिली, जिनसे भारतीय खिलाड़ियों ने विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए कई नए कीर्तिमान भी बनाए.
टी-20 वर्ल्ड कप के दौरान भारतीय टीम की बल्लेबाजी काफी विस्फोटक रही. साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेले गए मैच को छोड़ दें तो लगभग हर मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया. इसी दमदार खेल की बदौलत टीम इंडिया ने टी-20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया. इस जीत के साथ एक बार फिर स्पोर्ट्स सिटी मेरठ का नाम भी विश्व स्तर पर चमका, क्योंकि भारतीय खिलाड़ियों ने जिन बल्लों से नए-नए कीर्तिमान बनाए, उनमें से कई बल्ले मेरठ में तैयार किए गए थे.

दरअसल, मैच के दौरान विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए विशाल स्कोर बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी संजू सैमसन मेरठ में बनी कंपनी SCG के बल्ले से खेलते नजर आते हैं. टी-20 वर्ल्ड कप के दौरान भी उन्होंने इसी कंपनी के बल्ले का इस्तेमाल किया. अपनी शानदार बल्लेबाजी और अद्भुत खेल कौशल के दम पर उन्होंने कई बड़े शॉट लगाए और टीम की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया.

फाइनल मुकाबले में शानदार पारी खेलते हुए टीम का स्कोर 250 के पार पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाले शिवम दुबे भी मेरठ में बने बल्लों से खेलना पसंद करते हैं. इसके साथ ही तिलक वर्मा और सूर्यकुमार यादव जैसे खिलाड़ियों ने भी टी-20 वर्ल्ड कप के दौरान मेरठ में तैयार बल्लों का इस्तेमाल किया. इन खिलाड़ियों की विस्फोटक बल्लेबाजी के दम पर पाकिस्तान, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड, जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज जैसी टीमों के गेंदबाजों की जमकर धुनाई देखने को मिली.
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इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि खिलाड़ियों में मेरठ में बने बल्लों का कितना क्रेज है. मेरठ सूरजकुंड स्पोर्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुज कुमार सिंघल बताते हैं कि सिर्फ भारतीय ही नहीं, बल्कि विदेशी खिलाड़ियों को भी मेरठ में तैयार बल्ले काफी पसंद आते हैं. भले ही अब आधुनिक मशीनों का उपयोग होने लगा हो, लेकिन आज भी मेरठ में बल्लों की फाइनल फिनिशिंग कारीगर अपने हाथों से करते हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता और खासियत बनी रहती है.

उन्होंने बताया कि मेरठ के स्पोर्ट्स कारोबार में रिफ्यूजी परिवारों का बहुत बड़ा योगदान रहा है. बंटवारे के दौरान पाकिस्तान से जो शरणार्थी परिवार मेरठ आए थे, उन्होंने ही यहां स्पोर्ट्स से जुड़े कारोबार की नींव रखी थी. उस समय स्थानीय व्यापारियों ने भी उनका पूरा सहयोग किया. उसी का परिणाम है कि आज मेरठ में तैयार होने वाली स्पोर्ट्स सामग्री विश्व के कई देशों में बड़ी संख्या में सप्लाई की जाती है.

उन्होंने बताया कि मेरठ की प्रतिष्ठित कंपनियां SS और SG के बने बल्लों से कई खिलाड़ी खेलते नजर आते हैं. उनका कहना है कि मैच के दौरान जब खिलाड़ी बड़े शॉट लगाकर अपनी खुशी जाहिर कर रहे थे, तब बल्लों पर मेरठ की कंपनियों का नाम साफ दिखाई दे रहा था. यह देखकर बेहद गर्व और खुशी महसूस होती है. क्रांति धरा मेरठ में बने बल्लों की जो पहचान विश्व स्तर पर बनी हुई है, वह आज भी कायम है.

उन्होंने बताया कि मेरठ में कश्मीरी विलो सहित अन्य प्रकार की लकड़ी से भी बैट तैयार किए जाते हैं. हालांकि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मैचों में ज्यादातर खिलाड़ी इंग्लिश विलो से बने बल्लों का इस्तेमाल करते हैं. इसकी वजह यह है कि इंग्लिश विलो की लकड़ी बेहद खास मानी जाती है और इससे बने बल्लों में बड़े शॉट लगाने की बेहतर क्षमता होती है, इसलिए प्रोफेशनल क्रिकेट में इन्हें ज्यादा पसंद किया जाता है.

बताते चलें कि हर साल मेरठ की प्रतिष्ठित कंपनियों में भारतीय खिलाड़ियों के साथ-साथ विदेशी खिलाड़ी भी अपने सामने बैट की फिनिशिंग कराते हुए नजर आते हैं, ताकि वे मैच के दौरान बेहतर प्रदर्शन कर सकें. इतना ही नहीं, आईपीएल के समय खिलाड़ी यहां से विशेष ऑर्डर पर एक साथ 6 या उससे अधिक बल्ले तैयार कराते हैं. इन बल्लों को उनकी जरूरत और खेलने की शैली के अनुसार तैयार किया जाता है, जिससे उन्हें मैदान पर बेहतर परफॉर्मेंस देने में मदद मिल सके.