मोबाइल छोड़ किताब थामेंगे बच्चे! कानपुर में शुरू हुई नई पढ़ने की मुहिम, जानिए

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मोबाइल छोड़ किताब थामेंगे बच्चे! कानपुर में शुरू हुई नई पढ़ने की मुहिम, जानिए


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मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन की बढ़ती लत के बीच अब कानपुर में बच्चों और युवाओं को फिर से किताबों की ओर मोड़ने की कोशिश की जा रही है. पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने के लिए जिले में ‘बुक-अ-मंथ’ और ‘बुके नहीं, बुक’ जैसे अभिनव अभियान शुरू किए गए हैं, जिनका मकसद पठन संस्कृति को मजबूत करना और आने वाली पीढ़ी को ज्ञान से जोड़ना है.

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कानपुर. कानपुर नगर में बच्चों और युवाओं को फिर से किताबों की दुनिया से जोड़ने के लिए प्रशासन ने एक सराहनीय पहल शुरू की है. मोबाइल और डिजिटल डिवाइस पर बढ़ती निर्भरता के बीच पढ़ने की आदत को मजबूत करने के उद्देश्य से ‘बुक-अ-मंथ’ और ‘बुके नहीं, बुक’ जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं. इन पहलों का मकसद बच्चों को स्क्रीन से दूर कर किताबों के करीब लाना और उनमें पठन संस्कृति विकसित करना है.

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यदि बचपन से ही बच्चों में किताबें पढ़ने की आदत डाली जाए, तो उनका मानसिक विकास बेहतर होता है और वे जीवन में सही दिशा में आगे बढ़ते हैं. किताबें न केवल ज्ञान बढ़ाती हैं, बल्कि सोचने, समझने और कल्पनाशक्ति को भी मजबूत करती हैं.

हर महीने एक किताब पढ़ने की आदत
पठन संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ‘बुक-अ-मंथ’ की अवधारणा को स्कूलों और अभिभावकों के सहयोग से लागू किया जा रहा है. इसके तहत बच्चों को पढ़ाई के अलावा हर महीने कम से कम एक किताब पढ़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. जिलाधिकारी का कहना है कि नियमित पठन से बच्चों की भाषा, समझ और अभिव्यक्ति क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होता है. भविष्य में अच्छे पाठकों को सम्मानित करने की योजना भी है, ताकि बच्चों में पढ़ने के प्रति उत्साह बना रहे.

‘बुके नहीं, बुक’ से बदलेगी सोच
इसी कड़ी में ‘बुके नहीं, बुक’ अभियान भी शुरू किया गया है. इसके तहत कार्यक्रमों और सम्मान समारोहों में फूलों के गुलदस्ते की जगह किताबें भेंट करने की अपील की गई है. इससे न सिर्फ किताबों का महत्व बढ़ेगा, बल्कि समाज में पढ़ने की संस्कृति को भी नई पहचान मिलेगी.

राज्य पुस्तकालय भी बना सहारा
कानपुर के चुन्नीगंज स्थित राज्य पुस्तकालय में पुस्तकों का बड़ा संग्रह उपलब्ध है. यहां मात्र 500 रुपये की सुरक्षा धनराशि देकर सदस्यता ली जा सकती है और पढ़ने के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होता. प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को मोबाइल से दूर रखकर पुस्तकालय और किताबों की ओर प्रोत्साहित करें. जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि “जीवन का सॉफ्टवेयर पुस्तकों से ही विकसित होता है.” उनका मानना है कि यदि समाज में पढ़ने की आदत मजबूत होगी, तो आने वाली पीढ़ी अधिक ज्ञानवान, संवेदनशील और समझदार बनेगी. इसी लक्ष्य के साथ प्रशासन हर नागरिक से इस मुहिम में अपनी छोटी-सी भूमिका निभाने की अपील कर रहा है.

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Madhuri Chaudhary

पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें

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