यूपी की अनोखी होली, जहां ‘लाट साहब’ कोतवाल से मांगते हैं साल भर का क्राइम रिकॉर्ड!
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Shahjahanpur Holi Celebration: शाहजहांपुर की ऐतिहासिक होली और ‘लाट साहब’ का जुलूस पूरी दुनिया में अपनी अनूठी परंपरा के लिए मशहूर है. इस जुलूस में जहां लाट साहब को जूते-चप्पलों से मारकर अंग्रेजों के प्रति प्रतीकात्मक गुस्सा जाहिर किया जाता है, वहीं कोतवाली में कोतवाल द्वारा उन्हें सलामी देने और ‘नेग’ भेंट करने का दृश्य बेहद रोमांचक होता है. इतिहासकार डॉ. विकास खुराना के अनुसार, यह जुलूस प्रशासनिक ट्रेनिंग का भी एक अहम हिस्सा बन चुका है.
शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में होली के दिन निकलने वाले ऐतिहासिक ‘लाट साहब’ के जुलूस में इस बार भी परंपरा और रोमांच का अनोखा संगम देखने को मिलेगा. इस जुलूस का सबसे खास हिस्सा वह है, जब लाट साहब शान से कोतवाली पहुंचते हैं. वहां कोतवाल उन्हें बकायदा सलामी देते हैं. परंपरा के अनुसार, लाट साहब शहर कोतवाल से साल भर के अपराधों का क्राइम रिकॉर्ड मांगते हैं. इस ‘जवाबदेही’ से बचने के लिए कोतवाल साहब उन्हें सम्मान के तौर पर ‘नेग’ और उपहार देते हैं. नजराना पाकर लाट साहब खुश हो जाते हैं और अपनी आगे की यात्रा जारी रखते हैं.
प्रख्यात इतिहासकार डॉ. विकास खुराना इस जुलूस को एक ऐसी जीवित विरासत मानते हैं, जो हमें ब्रिटिश शासन की याद दिलाती है. उन्होंने बताया कि यह जुलूस अंग्रेजों के खिलाफ जनता के गुस्से को दिखाने का एक प्रतीकात्मक तरीका था. लाट साहब को जूते-चप्पलों से मारना दरअसल उस समय के विदेशी शासकों के अहंकार को चूर करने का प्रतीक है. डॉ. खुराना बताते हैं कि यह परंपरा इतनी मजबूत है कि अदालतों ने भी इसे संस्कृति का हिस्सा माना है. आज यह जुलूस न केवल इतिहास है, बल्कि प्रशासनिक ट्रेनिंग का एक अहम हिस्सा भी बन चुका है.
आस्था और अनूठा सफर है है ये जुलूस
लाट साहब का यह सफर बाबा चौक के चौकसी नाथ मंदिर से पूरे जोश के साथ शुरू होता है. भैंसा गाड़ी पर सवार लाट साहब जब गलियों से निकलते हैं, तो लोग उन पर जूते-चप्पलों और झाड़ू की बरसात करते हैं. लेकिन इसी के साथ एक सुंदर पहलू यह भी है कि लाट साहब भगवान बाबा विश्वनाथ मंदिर में जाकर माथा टेकते हैं. अब तो कई जगहों पर लोग फूलों से भी उनका स्वागत करने लगे हैं, जो इस परंपरा में आते बदलाव और भाईचारे को दिखाता है.
अफसरों की ट्रेनिंग का हिस्सा
यह जुलूस सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि नए अधिकारियों के लिए सीखने का एक बड़ा मौका है. सिविल सेवा की पढ़ाई और ट्रेनिंग में इसे एक मिसाल के तौर पर पढ़ाया जाता है. नए आईएएस और आईपीएस अफसरों को सिखाया जाता है कि कैसे इतने बड़े और चुनौतीपूर्ण जुलूस को शांति से संपन्न कराया जाए. जिला प्रशासन की देखरेख में निकलने वाला यह जुलूस दिखाता है कि कैसे कानून-व्यवस्था को लोक-परंपराओं के साथ तालमेल बिठाकर चलाया जा सकता है.
लोगों में रहता है भारी उत्साह
शाहजहांपुर के लोगों और खासकर बच्चों के लिए यह साल का सबसे रोमांचक दिन होता है. पूरा शहर इस नजारे को देखने के लिए सड़कों पर उमड़ पड़ता है. कोतवाली में सलामी लेने और शहर के मुख्य हिस्सों का चक्कर काटने के बाद, यह यात्रा अंत में ‘पटी गली’ पर जाकर पूरी होती है. सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी उतनी ही नई और कौतूहल भरी लगती है. इसके खत्म होते ही शहर में होली का असली जश्न और रंग शुरू हो जाता है.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें